International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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21वीं सदी में हिंदी सिनेमा की नायिकाएँ : अबला से सबला भूमिकाओं की ओर

Author(s) Mr. Shashank Tripathi, Dr. Mamata Upadhyay
Country India
Abstract गतिशीलता ही जीवन का सार्वभौम सत्य है , जो मानव जीवन के हर आयाम पर पूर्णरूप से लागू होता है | एक समय था , जब साहित्य को समाज का आईना माना जाता था , समयांतराल में साहित्य के साथ- साथ सिनेमा भी समाज का दर्पण बन गया है | हिंदी सिनेमा में सदैव से स्त्री को एक अबला के तौर पर दिखाया जाता रहा है , जो गुंडों के बीच फँस जाती है और उसे बचाने के लिए हीरो आता है | यह पटकथा सिनेमा के उदय के साथ ही शुरू हुई , परन्तु वर्तमान 21 वीं सदी में यह पटकथा बदलाव की ओर अग्रसर दिखती है | अब महिलाओं को भी फिल्मों में सशक्त भूमिकाओं में देखा जा सकता है , न केवल एक मजबूत माँ बल्कि जासूस , पायलट , पुलिस अधिकारी और बहुत से ऐसे पात्रों के रूप में भी , जो पुरुष प्रधान पात्र के तौर पर प्रचलित रहे हैं | 21वीं सदी में हिंदी सिनेमा ने , न केवल महिला प्रधान फिल्मों के निर्माण पर जोर दिया है बल्कि नायिकाओं के भूमिका को भी सशक्त रूप में पेश करना शुरु किया है | परन्तु बदलाव के इस संक्रमण काल में कुछ चुनौतियाँ भी परिलक्षित हो रही हैं , जैसे – नायिका की सशक्त भूमिका परन्तु अश्लील दृश्यों की फिल्म में भरमार | प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य यह ज्ञात करना है कि हिंदी सिनेमा ने किस प्रकार नायिका की भूमिकाओं को सशक्त रूप में समाज के सामने रखा है | परन्तु उसके बाद भी नायिका प्रधान फिल्मो के समक्ष क्या चुनौतियाँ विद्यमान हैं और उन्हें दूर करने के लिए क्या आवश्यक कदम उठाये जा सकते हैं | शोध पत्र मुख्यतः द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है , साथ ही अवलोकन पद्धति का प्रयोग भी किया गया है |
Keywords 21वीं सदी , हिंदी सिनेमा , नायिका , भूमिका , सबला
Field Arts > Movies / Music / TV
Published In Volume 7, Issue 6, November-December 2025
Published On 2025-11-13
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i06.60291

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