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E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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आत्मनिर्भर भारत निर्माण में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों की प्रासंगिकता

Author(s) Akash Deep, Seema Panwar
Country India
Abstract प्रस्तुत शोध पत्र में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के द्वारा दिये गये ‘‘आत्मनिर्भर भारत निर्माण में विचारों का अध्ययन’’ किया गया है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की योजनाएं सम्पूर्ण भारतवर्ष के लोगों के विकास के लिए स्थापित की गई हैं, एवं भारत सरकार इनके अम्ल के लिए दृढ़ संकल्पित है। सभी योजनाएँ बहुआयामी उद्देश्य के लिए भारत के स्वर्णिम एवं विकास हेतु अग्रसर है और इन योजनाओं की जानकारी प्रत्येक वर्ग के युवकों, विशेष समुदाय के लोगों के लिए अत्यंत आवश्यक है ताकि इनका लाभ उठाकर प्रत्येक समाज को विकास की ओर अग्रसारित किया जा सके उनकी योजनाओं के माध्यम से भारत के युवा बेरोजगार को उपलब्ध कराने, स्वरोजगार हेतु प्रशिक्षण देने, आवास उपलब्ध कराने, समुचित वर्ग को बिजली व्यवस्था उपलब्ध कराने, शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने, व्यापक विकास के अवसरों को बढ़ाने एवं तमाम अन्य योजनाओं के द्वारा सबको लाभांवित किया जाता है। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य विकास कौशल, विकास एवं अन्य उपायों के माध्यम से आजीविका के अवसरों में वृद्धि कर शहरी और ग्रामीण गरीबी को कम करना है। कोई भी नीति निर्धारक संगठन या सरकार जो गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ लाना चाहती हैं एवं मानव कल्याण के मार्ग में प्रशस्त होना चाहती हैं उसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म-मानववाद एवं अंत्योदय के विचार भारत को आत्मनिर्भर बनाने का आधार हैं। वर्तमान भाजपा सरकार की आर्थिक एवं मानव कल्याणकारी नीतियाँ इस दिशा में अत्यंत प्रभावकारी हैं। जिसमें भविष्य की झलक दिखाई देती है। जिससे मानव कल्याण के लिए एक रचनात्मक एवं प्रगतिशील परिस्थितियां उत्पन्न की जा सकें अपितु मानव कल्याण के स्थायी विकास को सकारात्मक दिशा मिल सके।
Keywords एकात्म मानववाद, अंत्योदय, केन्द्र-सरकार, मानव कल्याण, योजनाएँ, आत्मनिर्भर।
Field Sociology > Politics
Published In Volume 6, Issue 1, January-February 2024
Published On 2024-01-20
Cite This आत्मनिर्भर भारत निर्माण में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों की प्रासंगिकता - Akash Deep, Seema Panwar - IJFMR Volume 6, Issue 1, January-February 2024. DOI 10.36948/ijfmr.2024.v06i01.12300
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2024.v06i01.12300
Short DOI https://doi.org/gtfmqd

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