International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

A Widely Indexed Open Access Peer Reviewed Multidisciplinary Bi-monthly Scholarly International Journal

Call for Paper Volume 6 Issue 2 March-April 2024 Submit your research before last 3 days of April to publish your research paper in the issue of March-April.

‘गङ्गासागरीयम्‌’ महाकाव्य की कथावस्तु एवं रस निष्पत्ति

Author(s) Kartik Pandya
Country India
Abstract गङ्गासागरीयम्‌ पं. विष्णुदत्त शुक्ल प्रणीत संस्कृत की एक आधुनिक/अद्यतन कृति है। यह वस्तुतः एक रसात्मक महाकाव्य है। नायक नायिका की समासोक्ति प्रस्तुति के साथ ही दैत्य कार्य का भी काव्य में समावेश हुआ है। गंगा को नायिका, समुद्र को नायक तथा मेघ को दूत बनाकर प्रस्तुत किया गया है। गंगा और सागर, दूत के माध्यम से एक दूसरे के गुण सौन्दर्य का श्रवण करते है और उसमें पारस्परिक आकर्षण उत्पन्न होता है।
Keywords गंगा, अर्वाचीन, काव्यशास्त्रीय
Field Arts
Published In Volume 6, Issue 1, January-February 2024
Published On 2024-02-11
Cite This ‘गङ्गासागरीयम्‌’ महाकाव्य की कथावस्तु एवं रस निष्पत्ति - Kartik Pandya - IJFMR Volume 6, Issue 1, January-February 2024. DOI 10.36948/ijfmr.2024.v06i01.13291
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2024.v06i01.13291
Short DOI https://doi.org/gthqnt

Share this