International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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विवेकानंद के चिंतन में धर्म की अवधारणा : एक दार्शनिक विश्लेषण

Author(s) Mr. Pradeep Kumar, Dr. Sanjay Kumar Singh
Country India
Abstract विवेकानंद भारत के ऐसे धार्मिक, दार्शनिक और संन्यासी हैं, जिन्होंने अपने चिंतन से पूरी दुनिया को प्रभावित किया। विवेकानंद के धर्म में मानवतावाद और विश्व बंधुत्व की अवधारणा मिलती है । विवेकानंद कहते हैं, धर्म रीति -रिवाज अथवा सैद्धांतिक मान्यता भर नहीं है । धर्म तो ईश्वर साक्षात्कार अथवा आत्म साक्षात्कार का मार्ग है। जिस मार्ग पर चलकर व्यक्ति शाश्वत आनंद को उपलब्ध होकर व्यक्तिगत मुक्ति तो प्राप्त करता ही है ,साथ ही साथ समाज के अन्य मनुष्यों के उत्थान में सहायक भी होता है। प्रस्तुत लेख में स्वामी विवेकानंद द्वारा प्रस्तुत भेदभाव से रहित, समानता पर आधारित सार्वभौम धर्म की अवधारणा का दार्शनिक विश्लेषण कर यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि किस प्रकार स्वामी विवेकानंद का धर्म सार्वभौम धर्म के रूप में मानवता के उज्जवल भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर सकता है ।
Keywords मानवतावाद , विश्वबन्धुत्व, आत्मसाक्षात्कार ,सार्वभौम धर्म
Field Arts
Published In Volume 7, Issue 4, July-August 2025
Published On 2025-08-23
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i04.54027

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