International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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भारत में बाल अपराध:एक विश्लेषण

Author(s) Mr. Bal Govind Verma, Dr. Dal Chandra
Country India
Abstract जब किसी बालक द्वारा कोई कानून-विरोधी या समाज विरोधी कार्य किया जाता है तो उसे 'बाल अपराध कहते हैं। भारत में बाल न्याय अधिनियम, 1986 (संशोधित 2000) के अनुसर 16 वर्ष तक की आयु के लड़कों एवं 18 वर्ष तक की आयु की लड़कियों के अपराध करने पर बाल अपराधी की श्रेणी में सम्मिलित किया गया है। बाल अपराध की अधिकतम आयु सीमा अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग है। इस आधार पर किसी भी राज्य द्वारा निर्धारित आयु सीमा के अन्तर्गत बालक द्वारा किया गया कानून विरोधी कार्य बाल अपराध है। केवल आयु ही बाल अपराध को निर्धारित नहीं करती वरन् इसमें अपराध की गंभीरता भी महत्त्वपूर्ण पक्ष है। 7 से 16 वर्ष का लड़का तथा 7 से 18 वर्ष की लड़की द्वारा कोई भी ऐसा अपराध न किया गया हो जिसके लिए राज्य मृत्यु दण्ड या आजीवन कारावास देता है जैसे हत्या, देशद्रोह, घातक आक्रमण आदि तो वह बाल अपराधी माना जायेगा। मानव समाज में बाल अपराध एक बहुत बड़ी समस्या बन गयी है। बच्चे भविष्य की धरोहर हैं, लेकिन सामाजिक कमजोरियों और सरकार के लचर रवैये के चलते हमारी यह धरोहर लगातार पतन के मार्ग पर आगे बढ़ती जा रही है। बाल अपराधों की बढ़ती संख्या हमारे समाज के ललाट पर एक ऐसा कलंक है जिससे तत्काल निजात पाने की आवश्यकता है।
Keywords अपराध, आवारागर्दी, निरूद्देश्य, नकारात्मक एवं दुष्कर्म।
Field Sociology > Administration / Law / Management
Published In Volume 7, Issue 4, July-August 2025
Published On 2025-08-30
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i04.54733

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