International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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भारतीय चुनाव प्रणाली का पुनर्गठन: ‘एक देश, एक चुनाव’ की व्यवहारिकता और भविष्य

Author(s) Dr. Aakanksha Gaur
Country India
Abstract भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहाँ चुनावी प्रक्रिया, लोकतांत्रिक व्यवस्था की धुरी मानी जाती है। वर्तमान में केंद्र और राज्यों में अलग-अलग समय पर चुनाव होने से राजनीतिक अस्थिरता, नीतियों के क्रियान्वयन में बाधा, चुनावी खर्च में अत्यधिक वृद्धि तथा प्रशासनिक तंत्र पर अतिरिक्त बोझ जैसे अनेक प्रश्न सामने आते हैं। इन चुनौतियों के समाधान के रूप में “एक देश, एक चुनाव” की अवधारणा प्रस्तुत की गई है, जिसके अंतर्गत लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाने का प्रस्ताव है। इस शोध पत्र में इस अवधारणा की व्यवहारिकता, पक्ष-विपक्ष के तर्क, लोकतंत्र पर प्रभाव, कानूनी व प्रशासनिक चुनौतियाँ तथा इसके सफल क्रियान्वयन हेतु भविष्य की संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि यदि आवश्यक संवैधानिक संशोधन, राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक सुधार सुनिश्चित किए जाएँ तो “एक देश, एक चुनाव” भारतीय लोकतंत्र को अधिक स्थिर, पारदर्शी और उत्तरदायी बना सकता है।
Keywords भारतीय चुनाव प्रणाली, एक देश एक चुनाव, लोकतंत्र और पारदर्शिता, राजनीतिक स्थिरता, प्रशासनिक सुधार, संवैधानिक प्रावधान
Field Sociology > Politics
Published In Volume 7, Issue 5, September-October 2025
Published On 2025-09-02
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i05.54984

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