International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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भोजपुरी फिल्में और लोक कला: परंपरा से आधुनिकता तक

Author(s) Akhilesh Yadav
Country India
Abstract भोजपुरी सिनेमा भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है, जिसने लोकगीतों, लोकनाट्य और ग्रामीण संस्कृति को बड़े परदे पर प्रस्तुत करके न केवल मनोरंजन प्रदान किया, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक दस्तावेज़ भी रचा। 1963 में गंगा मईया तोहे पियरी चढ़इबो से आरंभ हुई यात्रा ने भोजपुरी समाज को उसकी भाषा और लोक परंपराओं पर गर्व कराया। यद्यपि समय के साथ इसमें व्यावसायिक दबाव, अश्लीलता विवाद और बाज़ारवाद की चुनौती भी आई, फिर भी यह सिनेमा लोक संस्कृति और प्रवासी समाज की अस्मिता का वाहक बना रहा।
यह शोध-पत्र सांस्कृतिक अध्ययन (Cultural Studies), प्रतिनिधित्व सिद्धांत (Representation Theory) और ग्राम्शी की हेजेमनी (Hegemony) जैसे सैद्धांतिक ढाँचों पर आधारित है। इसमें विश्लेषण किया गया है कि किस प्रकार लोकगीत (बिरहा, चैता, कजरी, सोहर), लोकनृत्य, नौटंकी और धार्मिक लोकाचार फिल्मों में अभिव्यक्त हुए। साथ ही इसमें महिला पात्रों का प्रतिनिधित्व, प्रवासी समाज की पहचान और आधुनिक डिजिटल युग में संभावनाओं का अध्ययन भी किया गया है।
Keywords ): भोजपुरी सिनेमा, लोक संस्कृति, लोकगीत, लोकनाट्य, महिला प्रतिनिधित्व, अश्लीलता, प्रवासी समाज, वैश्वीकरण।
Field Sociology > Journalism / Media
Published In Volume 7, Issue 5, September-October 2025
Published On 2025-09-02
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i05.55022

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