International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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संस्कृति और पर्यटन के प्रादुर्भाव की नाभि स्थली- मूलतापी

Author(s) Ms. पुष्पादेवी साहू
Country India
Abstract ताप्ती भारत की उन प्रमुख नदियों में से एक है जो पूर्व से पश्चिम की ओर बहती हैं। यह मध्य प्रदेश के मुलताई से निकलकर महाराष्ट्र और गुजरात से होते हुए अरब सागर में खंभात की खाड़ी में मिलती है। यह नदी अपने बेसिन क्षेत्र, विशेषकर महाराष्ट्र और गुजरात के लिए कृषि का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसके किनारे उपजाऊ मैदान गन्ना, कपास और गेहूं जैसी फसलों की खेती में सहायक हैं। बुरहानपुर और सूरत जैसे कई महत्वपूर्ण शहर ताप्ती के किनारे बसे हैं, जिसने उनके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ताप्ती नदी का इतिहास और सांस्कृतिक महत्व बहुत गहरा है, जो इसे भारत की पवित्र नदियों में एक विशेष स्थान देता है। सूर्यप पौराणिक कथाओं के अनुसार, ताप्ती को सूर्य देव की पुत्री माना जाता है। कहा जाता है कि सूर्य ने अपनी अत्यधिक गर्मी से लोगों को बचाने के लिए उसे नदी के रूप में पृथ्वी पर भेजा था। इसीलिए, इसका नाम 'तप्त' यानी गर्मी से निकला हुआ है। ताप्ती की महिमा का वर्णन प्राचीन स्कंद पुराण में भी मिलता है, जो इसके ऐतिहासिक महत्व की पुष्टि करता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ताप्ती को शनि देव की बहन भी माना जाता है। इसलिए, जो लोग शनि के प्रकोप से पीड़ित होते हैं, उन्हें ताप्ती में स्नान करने से राहत मिलती है। ऐसी भी मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान राम ने ताप्ती नदी के किनारे धार्मिक अनुष्ठान किए थे, जिससे यह आध्यात्मिक साधना का एक स्रोत बन गई। ताप्ती को भारत की सात पवित्र नदियों में से एक माना जाता है. जिसमें गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा और सिंधु भी शामिल हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि ताप्ती नदी में स्नान करने से पापों का नाश होता है और आत्मा को शुद्धता तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। ताप्ती नदी में अस्थि विसर्जन करने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि ऐसा करने से आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
Keywords ताप्ती, मुलताई, सांस्कृतिक, पौराणिक, ऐतिहासिक, धार्मिक अनुष्ठान, पवित्र
Field Arts
Published In Volume 7, Issue 5, September-October 2025
Published On 2025-09-04
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i05.55417

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