International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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"गांधीवादी शिक्षा दर्शन: वर्त्तमान शिक्षा व्यवस्था के पुनर्निर्माण की दिशा में एक अध्ययन"

Author(s) Mr. VINAY KUMAR
Country India
Abstract महात्मा गांधी ने आजीवन सत्य, अहिंसा, समानता, नैतिकता, एकता और न्याय के लिए संघर्ष किया। वे अहिंसा तथा सत्य के दिव्य संदेशवाहक थे, उन्होंने कहा था कि “ मै किसी से द्वेष नहीं करूँगा। मै झूठ को सत्य से जीतूंगा और असत्य से संघर्ष करता हुआ सभी कष्टों को सहन करूँगा”। उनके संघर्ष कभी भी व्यक्तिगत नहीं रहे, बल्कि उन्होंने सम्पूर्ण जनमानस को एक परिवार माना । उनके संघर्षपूर्ण जीवन से कई तरह के दर्शनों का साक्षात्कार होता है, जिसमें उनका शिक्षा-दर्शन बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है । महात्मा गाँधी का सामाजिक एवं राजनितिक क्षेत्रो में योगदान इतना व्यापक और दर्शनीय है कि शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के तरफ उतना ध्यान नही गया, जितना की दिया जाना चाहिए । बचपन में हम सभी ने “गांधी जी की चीनी वाली कहानी” सुनी होगी । हम लोगों ने एन.सी.ई.आर.टी की पुरानी पुस्तकों में अध्याय की शुरुआत के पहले “ गांधी जी का जन्तर” शीर्षक नाम का सन्देश भी पढ़ी होंगी एवं “गाँधी जी के तीन बंदर” के सन्देश को भी पढ़ा होगा, ये सभी प्रेरणाएं आज तक हमारे मस्तिष्क-पटल पर विराजमान है । प्रस्तुत आलेख में गांधी जी द्वारा प्रतिपादित शैक्षिक मूल्य जैसे:-बुनियादी शिक्षा व्यवस्था, सर्वांगीण विकास एवं चरित्र निर्माण, शांति- अहिंसा एवं नैतिक शिक्षा, अनौपचारिक शिक्षा एवं आदर्श अध्यापक के निर्माण में गाँधी जी के शैक्षिक मूल्य, मातृभाषा में शिक्षा के साथ-साथ स्त्री शिक्षा, गाँधी जी के मूल्यों पर आधारित राजनीति का स्वरूप के सन्दर्भ में वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की पुनर्रचना पर प्रकाश डाला जायेगा ।
Keywords बुनियादी शिक्षा, सर्वांगीण विकास, सत्याग्रह, शिक्षा दर्शन, शैक्षिक मूल्य, आदर्श अध्यापक, पुनर्रचना, गाँधी जी का जंतर, गाँधी जी के तीन बन्दर एवं सात सामाजिक बुराई
Field Sociology > Education
Published In Volume 7, Issue 5, September-October 2025
Published On 2025-09-08
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i05.55504
Short DOI https://doi.org/g925c8

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