International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी नायाकों प्रथम बिगुल फूॅका

Author(s) Prof. Dr. Gouri Singh Parte
Country India
Abstract शोध सारांश
भारत की संस्कृति, स्वाभिमान और स्वायत्तता के लिए जितना बलिदान और संघर्ष आदिवासियों का है, वैसा किसी का संसार में कहीं नहीं मिलता। भारत में प्रत्येक विदेशी आक्रमणकारी के विरुध्द जनजातियों ने सबसे पहले शस्त्र उठाये हैं। यदि देशी सत्तायें पराभूत हुईं हैं तो उन्हें संरक्षण देने का कार्य भी आदिवासियों ने ही किया है। इतिहास में एक भी ऐसा उदाहरण नहीं है जब किसी आक्रमणकारी के भय या लालच से भ्रमित होकर आदिवासियों ने घात किया हो। अंग्रेजी राज में सबसे पहले आदिवासियों ने स्वयत्व और स्वाभिमान की रक्षा के लिए मंजरों, टोलों से तीर-कमान उठाये और अंग्रेजों से संघर्ष किया। औपनिवेशिक शासन काल से संघर्ष का लम्बा आदिवासी इतिहास है, आदिवासी समूहों ने इस संग्राम में हिस्सेदारी की, उन्होंने अद्भुत भारतीय एकता का परिचय दिया। आदिवासी जनजाति के किसानों ने चेरों सामन्तों के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला। मध्यप्रदेश के आदिवासियों में विशेष रूप से भील नायक दशरथ, खाज्या नायक, शंकरशाह-रघुनाथशाह, सीताराम कंवर और रघुनाथ सिंह भिलाला, का विशेष रूप से योगदान रहा। मध्यप्रदेश में आदिवासी क्रांति का लम्बा इतिहास है।
शब्द कंुजी: औपनिवेशिक, संग्राम, सामंत, आदिवासी, मध्यप्रदेश, जबलपुर, गढा मण्डला, जमींदार और जागीरदार, सिपाही विद्रोह,।
Keywords Kruti Dev 010
Field Sociology > Politics
Published In Volume 7, Issue 5, September-October 2025
Published On 2025-09-26
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i05.56398

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