International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

A Widely Indexed Open Access Peer Reviewed Multidisciplinary Bi-monthly Scholarly International Journal

Call for Paper Volume 8, Issue 2 (March-April 2026) Submit your research before last 3 days of April to publish your research paper in the issue of March-April.

भारत में महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता की दिशा में नीतियाँ एवं प्रगति

Author(s) Ms. SHALU GUPTA, Dr. VIKRANT UPADHYAY
Country India
Abstract भारत के विकासशील राष्ट्र से विकसित राष्ट्र बनने की परिकल्पना "विकसित भारत 2047" को साकार करने के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण और लैंगिक समानता बेहद आवश्यक है। यह तभी संभव होगा जब महिलाएँ आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक जीवन में सक्रिय भागीदारी निभाएँ। हालाँकि, कई नीतियाँ और क़ानून महिलाओं की प्रगति के लिए बनाए गए हैं, फिर भी जमीनी स्तर पर इनके प्रभावी क्रियान्वयन की चुनौती बनी हुई है। सरकार की योजनाएँ जैसे बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ, स्टैंड-अप इंडिया और मातृत्व लाभ अधिनियम (2017) ने इस दिशा में सकारात्मक कदम बढ़ाए हैं, लेकिन इनका असर ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि लैंगिक समानता केवल सामाजिक न्याय का प्रश्न नहीं है बल्कि यह आर्थिक दृष्टि से भी ज़रूरी है। यदि श्रमबल में लैंगिक अंतर कम किया जाए तो भारत की जीडीपी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। वर्तमान संदर्भ में महिला सशक्तिकरण एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बन गया है। यह प्रक्रिया न केवल समाज के सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान देती है, बल्कि महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का मार्ग भी प्रशस्त करती है। हालाँकि इस दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त हुई हैं, फिर भी कई गंभीर चुनौतियाँ बनी हुई हैं—जैसे कि लैंगिक आधारित हिंसा, वेतन असमानता, महिला श्रम बल की कम भागीदारी और राजनीति में अल्प प्रतिनिधित्व। यह शोध पत्र इस बात पर बल देता है कि नीतियों का सतत् क्रियान्वयन, जमीनी स्तर पर सक्रिय भागीदारी और लैंगिक दृष्टि से संवेदनशील शासन व्यवस्था आवश्यक है, ताकि नीतिगत इरादों को वास्तविक परिणामों में बदला जा सके। अंततः निष्कर्ष यही निकलता है कि भारत ने भले ही लैंगिक समानता की दिशा में प्रगति की हो, लेकिन सच्चा महिला सशक्तिकरण तभी संभव है, जब सभी वर्गों की सहभागिता के साथ एक व्यापक, सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील और समावेशी दृष्टिकोण अपनाया जाए।
Keywords लैंगिक समानता, महिला सशक्तिकरण, भारत, सरकारी नीतियाॅं, योजनाऍं ।
Field Sociology > Education
Published In Volume 7, Issue 5, September-October 2025
Published On 2025-09-29
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i05.56669

Share this