International Journal For Multidisciplinary Research
E-ISSN: 2582-2160
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Volume 8 Issue 1
January-February 2026
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कबीर की कविता में ईश्वर की अवधारणा और आत्मा का संवाद
| Author(s) | Dr. Sangita Kumari |
|---|---|
| Country | India |
| Abstract | सारांश कबीर मध्यकालीन संत परंपरा के सर्वश्रेष्ठ कवियों में गिने जाते हैं, जिन्होंने भारतीय समाज, संस्कृति और अध्यात्म की गहराइयों को सहज, सुलभ और प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत किया। उनकी कविताओं में जीवन और जगत के विविध प्रश्नों के उत्तर मिलते हैं। विशेष रूप से आत्मा और परमात्मा के संबंध की जो व्याख्या कबीर ने की है, वह भक्ति आंदोलन की धारा को अद्वितीय ऊँचाई प्रदान करती है। उनके अनुसार ईश्वर न तो किसी धर्म-ग्रंथ में सीमित है और न ही बाहरी अनुष्ठानों, मूर्तियों अथवा धार्मिक कर्मकांडों में बंधा हुआ है। वह तो निर्गुण-निराकार सत्ता है, जो प्रत्येक जीव के भीतर विद्यमान है। इसीलिए आत्मा का परम लक्ष्य उसी परम सत्ता से मिलन करना है। कबीर की कविताओं में आत्मा और ईश्वर के बीच सतत संवाद दिखाई देता है। यह संवाद कभी वियोगिनी आत्मा की पुकार के रूप में प्रकट होता है, तो कभी संयोग की आनंदपूर्ण अनुभूति में। जल और समुद्र, लहर और सागर, दीपक और ज्योति जैसे प्रतीकों के माध्यम से उन्होंने आत्मा और ईश्वर के संबंध को स्पष्ट किया। उनकी दृष्टि में प्रेम ही ईश्वर तक पहुँचने का सर्वोत्तम साधन है। कबीर का प्रेम लौकिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक है, जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ देता है। कबीर का योगदान केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक भी है। उन्होंने सांप्रदायिक भेदभाव, जातिगत रूढ़ियों और अंधविश्वास का खंडन करते हुए सार्वभौमिक मानवतावादी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उनकी वाणी ने हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों को यह संदेश दिया कि ईश्वर न किसी विशेष जाति का है और न ही किसी धर्म का; वह सबका है और सबमें है। यह आलेख कबीर की कविता में ईश्वर की अवधारणा और आत्मा-परमात्मा संवाद की पड़ताल करता है। इसमें उनकी निर्गुण भक्ति, अद्वैत दृष्टिकोण, रहस्यवादी अनुभव तथा मानवतावादी स्वर पर गहराई से विचार किया गया है। |
| Keywords | निर्गुण भक्ति, आत्मा-परमात्मा संवाद, मानवतावाद |
| Field | Arts |
| Published In | Volume 7, Issue 5, September-October 2025 |
| Published On | 2025-09-30 |
| DOI | https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i05.56872 |
| Short DOI | https://doi.org/g95nnf |
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E-ISSN 2582-2160
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10.36948/ijfmr
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