International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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भारत की परिप्रेक्ष्य से वित्तीय समावेशन और उसके ग्रामीण विकास पर प्रभाव का मूल्यांकन

Author(s) Dr. Rajeshwar Prasad
Country India
Abstract वित्तीय समावेशन का मुख्य उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेष रूप से वंचित और ग्रामीण जनसंख्या तक बैंकिंग, बीमा, क्रेडिट, पेंशन और अन्य वित्तीय सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करना है। भारत जैसे विकासशील देश में जहाँ अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्र में निवास करती है, वित्तीय समावेशन ग्रामीण विकास का एक महत्वपूर्ण घटक बन चुका है। यह शोध-पत्र भारत के परिप्रेक्ष्य से वित्तीय समावेशन का ग्रामीण विकास पर प्रभाव का मूल्यांकन करता है। अध्ययन में यह विश्लेषण किया गया कि कैसे वित्तीय समावेशन ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति, सामाजिक सशक्तिकरण, रोजगार के अवसर, आय में सुधार और स्थायी विकास पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
अध्ययन में प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों से डेटा एकत्रित किया गया। प्राथमिक डेटा के लिए ग्रामीण परिवारों का सर्वेक्षण और गहराई से साक्षात्कार लिया गया। द्वितीयक डेटा में सरकारी रिपोर्ट, RBI और NABARD के दस्तावेज शामिल हैं। आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। निष्कर्ष बताते हैं कि वित्तीय समावेशन से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवा, डिजिटल लेन-देन, माइक्रोफाइनेंस, और महिला सशक्तिकरण के माध्यम से विकास के कई पहलू उभरे हैं। इसके बावजूद डिजिटल साक्षरता की कमी, अवसंरचना की चुनौतियाँ, और योजनाओं के सही क्रियान्वयन में बाधाएँ अभी भी विद्यमान हैं। शोध यह सुझाव देता है कि समग्र ग्रामीण विकास हेतु वित्तीय समावेशन को और सुदृढ़ किया जाना चाहिए।
Keywords वित्तीय समावेशन, ग्रामीण विकास, भारत, माइक्रोफाइनेंस, डिजिटल बैंकिंग, जन-धन योजना, सशक्तिकरण
Field Mathematics > Economy / Commerce
Published In Volume 7, Issue 5, September-October 2025
Published On 2025-10-04
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i05.57187

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