International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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समकालीन हिंदी दलित कहानी में सामाजिक न्याय और अंबेडकरवादी दृष्टिकोण का प्रतिरूप

Author(s) पूनम, Dr. चंद्रभान सिंह यादव
Country India
Abstract यह शोध–पत्र समकालीन हिंदी दलित कहानी में सामाजिक न्याय और अंबेडकरवादी दृष्टिकोण के प्रतिरूप का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है कि दलित साहित्य, विशेषकर कहानी विधा, किस प्रकार वंचित समाज के संघर्ष, अस्मिता और समानता की आकांक्षा को अभिव्यक्त करता है। डॉ. भीमराव अंबेडकर के जाति–उन्मूलन, शिक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों और आर्थिक स्वतंत्रता से संबंधित विचार इस साहित्य के मूल में विद्यमान हैं। 1980 के बाद की प्रमुख हिंदी दलित कहानियों — ओमप्रकाश वाल्मीकि, मोहनदास नैमिशराय, सूरजपाल चौहान, कँवल भारती आदि की रचनाओं — का चयन करके उनका विश्लेषणात्मक और विषयगत अध्ययन किया गया है। इसमें सामग्री विश्लेषण और तुलनात्मक दृष्टिकोण का प्रयोग करते हुए कथानक, पात्र–निर्माण, भाषा–शैली और प्रतीकों के माध्यम से अंबेडकरवादी चेतना की अभिव्यक्ति की पहचान की गई है। निष्कर्षतः यह पाया गया कि समकालीन दलित कहानियाँ केवल पीड़ा का दस्तावेज नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का घोष–पत्र हैं, जो जाति–विरोधी चेतना, शिक्षा, स्त्री–स्वतंत्रता और श्रम–सम्मान के मूल्यों को रेखांकित करती हैं। ये कहानियाँ वर्तमान सामाजिक–राजनीतिक संदर्भ में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं और लोकतांत्रिक समाज के निर्माण में प्रेरक भूमिका निभाती हैं। यह शोध इस बात को स्पष्ट करता है कि साहित्य न केवल समाज का दर्पण है, बल्कि उसे दिशा देने वाला एक वैचारिक औजार भी है।
Keywords दलित साहित्य, समकालीन हिंदी कहानी, अंबेडकरवादी दृष्टिकोण, सामाजिक न्याय, जाति–उन्मूलन, लोकतांत्रिक मूल्य, स्त्री–स्वतंत्रता, श्रम–सम्मान।
Published In Volume 7, Issue 1, January-February 2025
Published On 2025-01-05

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