International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

A Widely Indexed Open Access Peer Reviewed Multidisciplinary Bi-monthly Scholarly International Journal

Call for Paper Volume 8, Issue 2 (March-April 2026) Submit your research before last 3 days of April to publish your research paper in the issue of March-April.

भारतीय समाज में महिला सशक्तिकरण और परंपरागत बाधाएँ

Author(s) Dr. VINAY PRATAP SINGH, SUSHMA PANDEY
Country India
Abstract भारतीय समाज में महिला सशक्तिकरण एक आवश्यक लेकिन चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है। जहाँ एक ओर महिलाएँ शिक्षा, विज्ञान, राजनीति और उद्योगों में आगे बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर वे परंपरागत सामाजिक बाधाओं, जैसे- पितृसत्तात्मक सोच, अशिक्षा, लैंगिक भेदभाव, और रूढ़िवादी मान्यताओं कृ से अब भी जूझ रही हैं।सशक्तिकरण का मतलब केवल आर्थिक या शैक्षिक आजादी नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से स्वतंत्र होना भी है। महिला सशक्तिकरण तभी संभव है जब समाज की सोच बदले, महिलाओं को बराबरी का दर्जा मिले और हर स्तर पर उन्हें सम्मानपूर्वक निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त हो।
इसलिए, जरूरत है कि हम परंपरागत रुकावटों को पहचानें, उन्हें दूर करने के लिए शिक्षा, जागरूकता और नीति-निर्माण का सहारा लें, ताकि नारी शक्ति वास्तव में श्सशक्तश् बन सके और भारत एक संतुलित, न्यायसंगत समाज की दिशा में आगे बढ़े।
Keywords महिला सशक्तिकरण, पितृसत्तात्मक समाज, लैंगिक भेदभाव, रूढ़िवादी परंपराएँ, समान अधिकार, निर्णय लेने की स्वतंत्रता, शिक्षा और जागरूकता, आर्थिक आत्मनिर्भरता, सामाजिक बदलाव, महिला अधिकार, घरेलू हिंसा, बाल विवाह, नीति निर्माण, न्याय और समानता, महिला सम्मान, संविधान प्रदत्त अधिकार, स्वरोजगार, सरकारी योजनाएँ, महिला नेतृत्व, नारी शक्ति ।
Published In Volume 7, Issue 5, September-October 2025
Published On 2025-10-11
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i05.57516

Share this