International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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हिन्दी साहित्य का भक्तिकाल : दो दृष्टिकोण ( आचार्य रामचन्द्र शुक्ल व डॉ. बच्चन सिंह)

Author(s) पूजा कुमारी
Country India
Abstract साहित्य समाज में हिन्दी साहित्य का इतिहास किसी पहचान का मोहताज नहीं है।इसकी समृद्धि व व्यापकता साहित्य के सुप्रसिद्ध साहित्यकारों व उनके साहित्यतिहासों की समाज में अपूर्व उपादेयता से सिद्ध होती हैं ।
यद्यपि हिन्दी साहित्य के लेखन परंपरा में कई भाषाविदों के साथ नागरी प्रचारिणी सभा जैसे हिन्दी साहित्य के लिए समर्पित संगठन आदि भी हुए जिन्होंने अपने - अपने स्तर से ' हिंदी साहित्य का इतिहास ' के शोध के लिए अपनी कलम चलाई । परंतु प्रत्येक विद्वानों के साहित्येतिहास में कालविभाजन व नामकरण संबंधी त्रुटियां लेखन की मौलिकता में अंतर्विरोध उत्पन्न करने लगा। इन्हीं असंगतों को दूर करते हुए हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने अपना साहित्येतिहास ' हिंदी साहित्य का इतिहास ' की नींव रखी। इन्होंने साहित्य को जनता की चित्तवृत्ति का संचित प्रतिबिंब की संज्ञा देकर हिन्दी साहित्य के समस्त इतिहास को ९०० वर्षों व चार भागों में व्यवस्थित किया।
आचार्य शुक्ल का साहित्येतिहासिक ग्रंथ अपने रचनाकाल से अब तक अपनी उपादेयता व मौलिकता में अव्वल रहा है। अतः हिन्दी साहित्य के
साहित्येतिहासिक ग्रंथों में शुक्ल का ग्रंथ ' उपजीव्य ' है।
दूसरी ओर हिन्दी साहित्य के सुप्रसिद्ध आलोचक व साहित्यकार डॉ. बच्चन सिंह हुए जिन्होंने संसार की परिवर्तनशील प्रवृति में साहित्य की स्थिरता को अस्वीकार किया।अतः समाज के बदलते परिवेशों व परिस्थितियों में साहित्य की पृष्ठभूमि में भी बदलाव को आवश्यक समझकर इन्होंने आचार्य शुक्ल के साहित्येतिहासिक ग्रंथ ' हिंदी साहित्य का इतिहास ' को चुनौती दी। साथ ही समाज के साथ - साथ जनसामान्य के दृष्टिकोण में बदलाव के सापेक्ष साहित्य का नवनिर्माण करने के प्रयोजन से इन्होंने अपने साहित्येतिहासिक ग्रंथ ' हिंदी साहित्य का दूसरा इतिहास ' की नींव रखी।
इस आलेख के माध्यम से हिन्दी साहित्य का स्वर्णकाल कहा जाने वाला कालखंड भक्तिकाल के संदर्भ में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल व डॉ. बच्चन सिंह के दो भिन्न दृष्टिकोणों का यथासंभव अध्ययन कर एक तुलनात्मक आधार व्यवस्थित करने का प्रयास किया गया है। जिससे हिन्दी साहित्य के पाठकों के लिए भक्तिकाल के संदर्भ में दो विद्वानों के भिन्न दृष्टिकोणों व तथ्यों से अवगत होने के साथ अपनी समालोचनात्मक क्षमता को वृद्धि करने में सहायक सिद्ध होगी।
Keywords भक्तिकाल का तुलनात्मक अध्ययन ( आचार्य रामचन्द्र शुक्ल व डॉ. बच्चन सिंह)
Field Sociology > Linguistic / Literature
Published In Volume 7, Issue 5, September-October 2025
Published On 2025-10-13
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i05.57533

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