International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा में कृषि प्रबंधन : तकनीक, परंपरा और समकालीन प्रासंगिकता

Author(s) Dr. Mohammad Sagir, Mr. Narendra Neelkanth
Country India
Abstract प्राचीन भारतीय समाज में कृषि को सबसे महत्वपूर्ण गतिविधियों में गिना जाता था, और इसे भारतीय सभ्यता की आधारशिला माना गया है। प्राचीन समय में कृषि केवल जीविकोपार्जन का साधन ही नहीं थी, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास का मुख्य स्रोत भी रही। भारत की प्राचीन कृषि पद्धतियों का प्रादुर्भाव दुनिया भर की कृषि प्रणालियों और सिद्धांतों पर दिखाई देता है। यह समय-समय पर विकसित हुई और इसमें तकनीकों तथा आधारभूत ढांचे में सुधार किए जाते रहे। कृषि की शुरुआत का संबंध सिंधु घाटी सभ्यता से माना जाता है, जहाँ लोग खेती में निपुण थे और प्राकृतिक संसाधनों का बुद्धिमानी से उपयोग करते थे। इस काल में विभिन्न कृषि तकनीकों और उपकरणों का विकास हुआ, जिससे व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामाजिक ढांचे को मजबूती मिली। प्राचीन भारतीय समाज में खेती न केवल भोजन संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करती थी, बल्कि समाज में समृद्धि और संतुलन बनाए रखने का साधन भी थी। इस प्रकार, प्राचीन भारत में कृषि ने न केवल आर्थिक स्थिति को मजबूत किया बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का आधार भी बनी। भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित कृषि प्रबंधन में मृदा संरक्षण, जल प्रबंधन, बीज चयन, जैविक खादों का उपयोग और फसल चक्र जैसी पद्धतियों पर बल दिया गया। ऋग्वेद, अथर्ववेद, ऋषि पाराशर, अर्थशास्त्र और वराह संहिता जैसे ग्रंथों में इन तकनीकों का विस्तृत वर्णन मिलता है। वर्तमान समय में जब जलवायु परिवर्तन, मृदा ह्रास और खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियाँ सामने हैं, तब प्राचीन कृषि प्रबंधन पद्धतियाँ टिकाऊ और स्थायी कृषि के लिए अत्यंत प्रासंगिक सिद्ध होती हैं। यह शोध-पत्र प्राचीन भारतीय कृषि प्रबंधन की तकनीकों, उनकी परंपराओं और आधुनिक संदर्भ में उनकी उपयोगिता का विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
Keywords परंपरा, प्रबंधन, समृद्धि , प्रासंगिक, आधारभूत, टिकाऊ कृषि, जैविक खेती, तकनीक, प्रादुर्भाव, पारंपरिक ज्ञान I
Published In Volume 7, Issue 5, September-October 2025
Published On 2025-10-16
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i05.57840

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