International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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बनारस की कला का प्रारूप एवं विश्लेषण

Author(s) Dr. Chandrabhushan Srivastava
Country India
Abstract बनारस (वाराणसी) भारत का एक प्राचीन और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध नगर है, जो न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है बल्कि कला, हस्तशिल्प और सौंदर्य चेतना का भी प्रमुख स्थल है। इस शोध-पत्र में बनारस की विविध कलाओं—जैसे बनारसी साड़ी-बुनाई, लकड़ी की नक्काशी, धातु रिपोसे (Repoussé), गुलाबी मीनाकारी, सॉफ्ट-स्टोन कला, हस्तमुद्रण, लोक-चित्रकला तथा संगीत-नाट्य जैसी प्रदर्शन कलाओं—का ऐतिहासिक, तकनीकी और सौंदर्यात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
अध्ययन से स्पष्ट होता है कि बनारस की कलाएं अपनी पारंपरिक तकनीकों, स्थानीय सामग्री और शिल्प-परंपरा के माध्यम से न केवल सौंदर्यबोध को व्यक्त करती हैं, बल्कि स्थानीय समाज और संस्कृति का भी अभिन्न अंग हैं। वैश्वीकरण, बाजारवाद और मशीन-उत्पादन ने इन कलाओं को नई चुनौतियों और अवसरों दोनों से परिचित कराया है। GI टैग, सरकारी संरक्षण, सांस्कृतिक कॉरिडोर, और डिज़ाइन नवाचार जैसी पहलों ने इन कलाओं को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अंततः यह शोध दर्शाता है कि बनारस की कला परंपराएं केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक अभिव्यक्ति हैं, जिनका संरक्षण, नवाचार और पीढ़ियों तक संवहन भारतीय कला जगत के लिए अत्यंत आवश्यक है।
Keywords बनारस की कला, वाराणसी हस्तशिल्प, बनारसी साड़ी, गुलाबी मीनाकारी, धातु रिपोसे, लकड़ी की नक्काशी, सॉफ्ट-स्टोन कला, हस्तमुद्रण, पारंपरिक कला, वैश्वीकरण, GI टैग, सांस्कृतिक कॉरिडोर, कलात्मक विरासत, भारतीय दृश्य कला।
Field Arts > Drawing
Published In Volume 7, Issue 5, September-October 2025
Published On 2025-10-14
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i05.57970

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