International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के काव्य में राष्ट्रीय चेतना

Author(s) Dr. Santosh Ladaku Gaikwad
Country India
Abstract दिनकर की कविताओं में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की महत्ता और उसमें शामिल संघर्षों की वीरता का उल्लेख मिलता है। उनके काव्य में स्वतंत्रता संग्रामियों, विशेष रूप से महात्मा गांधी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद और अन्य क्रांतिकारियों की वीरता और बलिदान को सराहा गया है। उनका प्रसिद्ध काव्य ‘कुरुक्षेत्र’ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और उसमें संलग्न संघर्ष की गाथा है। यहाँ वे एक ओर महाभारत के युद्ध को और दूसरी ओर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को जोड़ते हैं, जहाँ संघर्ष और बलिदान का महत्व है। दिनकर का अधिकांश साहित्य राष्ट्रीय चेतना से ओतप्रोत है। चीन के साथ युद्ध के दौरान, दिनकर की कविता ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ अत्यंत लोकप्रिय हुई। यह कविता देश के सैनिकों से अहिंसा का त्याग कर वीरता अपनाने का आह्वान करती है। दिनकर के काव्य में राष्ट्रीय जागरण की एक गहरी भावना दिखाई देती है। उन्होंने अपने काव्य के माध्यम से भारतीयों में देशभक्ति,आत्मविश्वास और राष्ट्रीय गौरव की भावना का संचार किया। दिनकर की कविताओं में राष्ट्रीय चेतना पूरी तरह से झलकती है। उन्होंने न केवल साम्राज्यवाद का, बल्कि सामन्तवाद का भी विरोध किया। उन्होंने उन लोगों के विरुद्ध साहसपूर्वक लिखा जो राष्ट्रवाद के नाम पर अपने ढोंग करते थे, जिनके लिए लोकतंत्र केवल एक भ्रम है और जो सत्ता पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
Keywords भारतीयता, स्वतन्त्रता, राष्ट्रियता, वीरता, चेतना, सामाजिक चेतना, राष्ट्र, राष्ट्रवाद, आदि।
Field Sociology > Linguistic / Literature
Published In Volume 7, Issue 5, September-October 2025
Published On 2025-10-22
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i05.58538

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