International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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वर्तमान समय में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा की आधुनिकता

Author(s) Dr. Shikha Khare
Country India
Abstract शिक्षा वह प्रक्रिया है जो मनुष्य को प्राचीन समय से ही प्रभावित करती आयी है और मनुष्य ने शिक्षा के माध्यम से ही संस्कृति और समाजको विकसित किया है। शिक्षा भौगोलिक परिस्थिति, देश, संस्कृति, समाज और समय के अनुसार कमजोर होती जा रही है परंतु आज हमारी शिक्षा की व्यवस्था ऐसी हो गई है, जहां हम शिक्षा का मतलब किसी विद्यालय, कालेज या विश्वविद्यालय में अलग-अलग विषयों की दस, बीस या तीस पुस्तकोंको शिक्षकों के माध्यम सेपढ़ लेने को ही समझा जाता हैं। जिस किसी व्यक्ति ने इस सीमित पाठ्यक्रम में रहकर जितनी अधिक से अधिक किताबें पढ़ी हैऔर जितनी ऊंची से ऊंचीपरीक्षा पास की हैं वह हम सभी के अनुसार उतना ही अधिक विद्वान या शिक्षित माना जाता है।आजकल लोग यह विचार रखते है कि जो व्यक्ति अक्षरों के ज्ञान से परिचित नहीं है या एक से अधिक या कई एक भाषाओं को एक साथ पढ़ने-लिखने की योग्यता नहीं है तोउसे किसी भी प्रकार से शिक्षित कहा ही नहीं जा सकता है। किन्तु हमारी प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा ऐसी नहीं थी उस समयशिक्षक विद्यार्थियों को केवल एक प्रकार की शिक्षा नहीं देते थे बल्कि उन्हें आध्यात्मिक शिक्षा, मानसिक शिक्षा, बौद्धिक शिक्षा और शारीरिक विकास की शिक्षा प्रदान कराते थे। ताकि उनके जीवन में आई किसी भी प्रकार की छोटी-मोटी समस्या का सामना कर सकते थे, लेकिन वर्तमान समय की शिक्षा समस्यों को हल करने में असमर्थ है। क्योंकि आज हमारी वर्तमान शिक्षा अंधेरी गुफा में अपना रास्ता भटक गई है।मूलतः हमें अपनी वर्तमान आधुनिक शिक्षा की दिशा में परिर्वतन लाना आवश्यक है, जिसे हम इस लेख के माध्यम से दर्शाने का प्रयास कर रहे हैं।
Keywords प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरुकुल प्रणाली, वर्तमान शिक्षा प्रणाली।
Published In Volume 7, Issue 5, September-October 2025
Published On 2025-09-05
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i05.59441

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