International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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नक्सलवाद : आंतरिक सुरक्षा के लिये संवेदनशील और जटिल बना दिया

Author(s) Rishi.kumari
Country India
Abstract महान कूटनीतिज्ञ चाणक्य के शब्दों में किसी भी प्रकार के आक्रमण से अपनी प्रजा की रक्षा करना प्रत्येक राजसत्ता का सर्वप्रथम उद्देश्य होता है। “प्रजा का सुख ही राजा का सुख और प्रजा का हित ही राजा का हित होता है।” प्रजा के सुख और हित को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने में दो वाहकों की भूमिका प्रमुख है, जिनमें पहला वाहक पड़ोसी या कोई अन्य देश हो सकता है जबकि दूसरा वाहक राज्य के भीतर अपराधियों की उपस्थिति हो सकती है।

चाणक्य ने अर्थशास्त्र में लिखा है कि एक राज्य को निम्नलिखित चार अलग-अलग प्रकार के खतरों का सामना करना पड़ सकता है-


आंतरिक रूप से सहायता प्राप्त बाहरी। भारत में आंतरिक सुरक्षा के परिदृश्य में उपर्युक्त खतरों के लगभग सभी रूपों का मिश्रण है। वर्तमान में चल रहे लॉकडाउन के बावज़ूद भारत वाह्य व आंतरिक सुरक्षा के स्तर पर विभिन्न चुनौतियों को झेल रहा है। इसका ज्वलंत उदाहरण पड़ोसी देश पाकिस्तान के द्वारा भारत में सीमापार से आतंकियों को भेजने हेतु की जा रही फायरिंग व पंजाब में लॉकडाउन का पालन कराने के दौरान निहंग सिखों द्वारा किया गया हमला है।


आंतरिक सुरक्षा का सामान्य अर्थ एक देश की अपनी सीमाओं के भीतर की सुरक्षा से है। आंतरिक सुरक्षा एक बहुत पुरानी शब्दावली है लेकिन समय के साथ ही इसके मायने बदलते रहे हैं। स्वतंत्रता से पूर्व जहाँ आंतरिक सुरक्षा के केंद्र में धरना-प्रदर्शन, रैलियाँ, सांप्रदायिक दंगे, धार्मिक उन्माद थे तो वहीँ स्वतंत्रता के बाद विज्ञान एवं तकनीकी की विकसित होती प्रणालियों ने आंतरिक सुरक्षा को अधिक संवेदनशील और जटिल बना दिया है।
Keywords राष्ट्र की संप्रभुता की सुरक्षा ,आंतरिक सुरक्षा के समक्ष उत्पन्न चुनौतियाँ ,धार्मिक कट्टरता एवं नृजातीय संघर्ष-
Field अन्य
Published In Volume 7, Issue 6, November-December 2025
Published On 2025-11-07
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i06.59670

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