International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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भारत छोड़ो आंदोलन 1942 के परिपेक्ष्य में बघेलखण्ड (स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान और सामाजिक प्रभाव)

Author(s) संजय सिंह
Country India
Abstract - भारत के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास न केवल दिल्ली, मुंबई, कोलकाता या बनारस जैसे बड़े नगरों तक सीमित नहीं है बल्कि इसके वास्तविक स्वरूप को समझने के लिए हमें ग्रामीण अंचलों और प्रादेशिक आंदोलन की ओर दृष्टिपात करना होगा। 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन क्विट इंडिया मूवमेंट संपूर्ण देश में एक जन आंदोलन के रूप में फूला। जिसमें हर वर्ग, हर क्षेत्र, हर समाज के लोगों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष का निर्णायक पड़ाव सिद्ध हुआ। इस परिप्रेक्ष्य में बघेलखंड क्षेत्र (जिसमें रीवा सतना सीधी शहडोल उमरिया अनूपपुर आदि जनपद सम्मिलित है) जिनका योगदान विशेषरूपेण से उल्लेखनीय है। यह क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि अपेक्षाकृत दूरस्थ और सांस्कृतिक रूप से ग्रामीण जनजातीय प्रधान रहा हो। किंतु यहां के लोगों में स्वतंत्रता के लिए बलिदान और समर्पण की भावना उतनी ही प्रखर थी जितने बड़े नगरों में। बघेलखंड के स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। कहीं सत्याग्रह के रूप में, कहीं भूमिगत गतिविधियों के रूप में और कहीं ब्रिटिश शासन के विरुद्ध खुले प्रतिरोध के रूप में।
Keywords बघेलखंड, भारत छोड़ो आंदोलन, सामाजिक राजनीतिक प्रभाव, राष्ट्रीयता, मानवाधिकार, महाराजा का अधिकार आंदोलन, रियासत, स्वतंत्रता, संग्राम सेनानी आदि।
Field Arts
Published In Volume 7, Issue 6, November-December 2025
Published On 2025-11-07
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i06.60118

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