International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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राष्ट्रीय निर्माण में अम्बेडकरवाद की भूमिका

Author(s) आशा सुनारीवाल
Country India
Abstract डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक, अर्थशास्त्री और विचारक थे। उन्होंने भारत के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक ढाँचे को एक नई दिशा दी। अंबेडकरवाद, अर्थात् डॉ. अंबेडकर के विचारों, दृष्टिकोणों और नीतियों का समुच्चय, राष्ट्रीय निर्माण की प्रक्रिया में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
1. सामाजिक न्याय और समानता की नींव - डॉ. अंबेडकर ने जातिवाद, छुआछूत और सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष किया। संविधान में अनुच्छेद 15, 17 और 46 के माध्यम से उन्होंने सामाजिक समानता और दलित वर्गों के उत्थान की नींव रखी। आरक्षण व्यवस्था के द्वारा उन्होंने वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया।
2. लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना - उन्होंने भारतीय लोकतंत्र को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक लोकतंत्र के रूप में परिभाषित किया। उनके विचारों ने भारत को एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने में अहम भूमिका निभाई।
Keywords राष्ट्रीय निर्माण, संविधान, सामाजिक न्याय, समानता, लोकतंत्र, आरक्षण
Published In Volume 5, Issue 4, July-August 2023
Published On 2023-08-10

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