International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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Bharat ki Vaishvik Shakti ke Roop Mein Ubharti Bhumika: Kootneeti, Suraksha aur Vyapar

Author(s) Manisha
Country India
Abstract कूटनीति, ”सुरक्षा और व्यापार“ आज के समय में एक अत्यंत प्रासंगिक और विचारोत्तेजक विषय है। 21वीं सदी को यदि ”भारत की सदी“ कहा जाए, तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। वैश्विक मंचों पर भारत की उपस्थिति, उसकी बढ़ती हुई आर्थिक, सैन्य और कूटनीतिक ताकत, तथा अंतरराष्ट्रीय मसलों पर उसकी मुखर भागीदारी इस बात का संकेत हैं कि भारत अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि एक संभावित वैश्विक शक्ति बनता जा रहा है। वैश्वीकरण के वर्तमान दौर में जहाँ दुनिया एक-दूसरे पर निर्भर हो चुकी है, वहाँ भारत अपनी रणनीतिक स्थिति, जनसांख्यिकीय लाभ और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ एक निर्णायक भूमिका निभाने की ओर अग्रसर है। कूटनीति के क्षेत्र में भारत ने बीते कुछ वर्षों में अपनी नीति को पारंपरिक गुटनिरपेक्षता से आगे ले जाकर एक ‘बहु-संरेखित’ (उनसजप-ंसपहदमक) दृष्टिकोण अपनाया है, जहाँ वह अमेरिका, रूस, यूरोप, अफ्रीका और एशियाई देशों के साथ अपने हितों के अनुसार संबंध विकसित कर रहा है। भारत अब केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि सक्रिय और दूरदर्शी कूटनीति का पक्षधर बन गया है। सुरक्षा के क्षेत्र में भी भारत ने अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग को बढ़ाया है। वहीं व्यापार और आर्थिक मोर्चे पर भारत वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनकर उभरा है, जहाँ स्टार्टअप, डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित ऊर्जा और नवाचार को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। यह विषय इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल भारत की ताकत का चित्रण नहीं करता, बल्कि यह प्रश्न भी उठाता है कि क्या भारत वैश्विक शक्ति के दायित्वों को निभाने के लिए तैयार है। वैश्विक शक्ति होने का अर्थ केवल सैन्य या आर्थिक ताकत नहीं होता, बल्कि एक ऐसा संतुलित, जिम्मेदार और दूरदर्शी दृष्टिकोण होता है जो वैश्विक शांति, समावेशी विकास और मानव कल्याण के मूल्यों पर आधारित हो। इस दृष्टिकोण से, भारत का उभार न केवल उसकी अपनी उपलब्धियों का परिणाम है, बल्कि यह वैश्विक व्यवस्था में चल रहे परिवर्तनों का भी प्रतीक है।
Keywords Diplomacy, Security, Trade
Field Sociology > Politics
Published In Volume 7, Issue 6, November-December 2025
Published On 2025-11-21
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i06.60715
Short DOI https://doi.org/hbb4hw

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