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E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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पलायन की बढ़ती प्रवृत्ति: चुनौतियां एवं समाधान ( उत्तराखंड राज्य के विशेष संदर्भ में )

Author(s) Dr. MANJU PANERU
Country India
Abstract उत्तराखण्ड राज्य का गठन 9 नवम्बर 2000 को भारत के 27वें राज्य के रुप में हुआ। अलग राज्य बनने के बाद उत्तराखण्ड में विकास का एक नया युग प्रारम्भ हुआ। यह भारत का तेजी से विकास करने वाला राज्य बना। राज्य गठन के बाद सरकार द्वारा कई उद्योग स्थापित किये गये परन्तु ये केवल तराई क्षेत्रों तक ही सीमित रहे जिस कारण गाँव के युवकों को रोजगार के लिए नगरों की ओर पलायन करने को मजबूर होना पड़ा।
उत्तराखण्ड में गाँव से नगरों की ओर पलायन की प्रवृत्ति है। इस पलायनवादी प्रवृत्ति के चलते अनेक प्रकार की समस्याऐं पैदा हो रही हैं। एक तरफ पलायन से नगरों में अव्यवस्था, विघटन, भ्रष्टाचार, अपराध, प्रदूषण, यातायात, आवास, जनसंख्या आदि की समस्याऐं हैं तो दूसरी तरफ गाँव में भी पलायन से अपने समाजिक समस्याऐं पैदा हो रही हैं। जिनमें सामाजिक सौहार्द में कमी और सामाजिक मान्यताओं और परम्पराओं के विघटन की समस्या प्रमुख है। ऐसे में गामीण पलायन रोकने की दिषा में सार्थक प्रयास जरुरी है।
गाँवों से बढ़ते पलायन को रोकने हेतु खेती एवं पशुधन को सम्पन्न एवं लाभकारी बनाना अत्यन्त आवष्यक है। गाँवों व निकटवर्ती शहरों में ही फूड प्रोसेसिंग ईकाईयां, लघु व कुटीर उद्योग तथा दस्तकारी उद्योगों को स्थापित करके रोजगर के अवसरों का विस्तार किया जाय। जिससे गाँवों का विकास होगा।
पलायन को रोकने के लिए ग्रामीण समाज को ही आर्थिक रुप से सबल बनाना होगा। स्थानीय स्तर पर ही ग्रामीणों को रोजगार की सुविधायें प्रदान करनी होंगी। आज देष में संतुलित रुप से विकास करने की आवष्यकता है।
सरकार समाज और देष के लिए इस प्रकार की उद्देष्यपूर्ण योजनायें बनायें जिससे कि देष के छोटे से छोटे गाँव के व्यक्तियों को रोजगार मिल सके और कोई विवषता में अपना घर ना छोड़े चाहे वह गाँव का हो अथवा नगर का।
Keywords पलायन, उत्तराखंड, विकास, रोजगार
Field Sociology
Published In Volume 7, Issue 6, November-December 2025
Published On 2025-12-02
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i06.62014

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