International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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विनोबा भावे के सर्वोदय संबंधी विचार

Author(s) Mr. Mahendra pandit
Country India
Abstract सर्वोदय महात्मा गांधी व इनके पहले सत्याग्रही विनोबा भावे का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक आंदोलन है। सर्वोदय सत्याग्रह की तरह हीं दो शब्दों के संयोजन से बना है अर्थात सर्व का अर्थ एक व सभी का उदय से है। इस प्रकार सर्वोदय का सही अर्थ सार्वभौमिक उत्थान या सभी का उत्थान या फिर सभी के कल्याण से होता है।
सर्वोदय अर्थात सबका उदय, सभी का विकास। सर्वोदय भारत का पुराना आदर्श है। विनोबा जी ने कहा है-सर्वोदय का अर्थ है सर्वसेवा के माध्यम से समस्त प्राणियों की उन्नति। ’सर्वोदय’ ऐसे वर्गविहीन, जातिविहीन और शोषण मुक्त समाज की स्थापना करना चाहता है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति और समूह को अपने सर्वांगीन विकास का साधन और अवसर मिले।
विनोबा भावे कहते हैं-जब हम सर्वोदय का विचार करते हैं, तब उंच-नीच भाव वाली वर्ण व्यवस्था दीवार की तरह सामने आ खडी हो जाती है। उसे तोडे बिना सर्वोदय कभी स्थापित नहीं हो सकता है।
Keywords loksZn;] lekos”kh fodkl] tkfrfoghu] fodsUnzhdj.k] lektokn
Field Arts
Published In Volume 7, Issue 6, November-December 2025
Published On 2025-12-10
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i06.62565

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