International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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महिला सशक्तिकरण में महिला बाल विकास की भुमिका एक मुल्याकंन

Author(s) डॉ. आशुतोष व्यास, राधेश्याम गमेती
Country India
Abstract भारत में ही नहीं बल्कि विष्व के सभी देषों में महिला सषक्तीकरण सर्वाधिक चर्चित हैं। वर्तमान समय में समानता सभी समाजों का एक प्रमुख लक्ष्य हैं। असमानता सार्वभौमिक हैं तथा सभी समाजों में विद्यमान हैं। वैष्विक स्तर पर समय-समय पर समानता लाने के उद्देष्य से कई आन्दोलन हुए हैं। समाज में महिला एवं पुरूष के बीच भी लैगिंक असमानता व्याप्त हैं। अवधारणात्मक आधार पर लैंगिकता समाज एवं समुदाय द्वारा स्त्री-पुरूष की सामाजिक भुमिकाओं, जिम्मेदारियों, उनके स्वाभाविक गुणों और शक्ति सम्बन्धों को इगिंत करती हैं।
भारत में महिलाओं के बडे पैमाने पर भिन्नताएॅ होने के कारण उनके बारें में व्यापक तौर पर अनुमान लगाना कठिन हैं, क्योंकि उसका सम्बन्ध अलग-अलग वर्गों, जातियों, धर्मो एवं समुदायों से है। इसके बावजूद भी यह कहा जा सकता हैं कि ज्यादात्तर महिलाएं पितृसतात्मक ढॉंचों और विचारधाराओं के कारण तकलीफें उठाती हैं, उन्हैं महिला- पुरूष असमानताओं और पराधीनता का सामना करना पडता हैं। महिलाएॅ सामाजिक और मानव विकास के समस्त सूचकों में पुरूषों से पिछड जाती हैं। महिलाओं के लिए भारत में दुनियां का सबसे प्रतिकूल महिला-पुरूष अनुपात हैं। महिलाओं के लिए जीवन प्रत्याशा पुरूषों से कम हैं, महिलाओं के स्वास्थ्य पोषण और शैक्षणिक स्तर पुरूषों की तुलना में बहुत कम हैैं। महिला अल्प कौशल और कम पारिश्रमिक वाली नौंकरियों तक सीमित रहती है, उन्हैं पुरूषों की तुलना में पारिश्रमिक और वेतन कम मिलते हैं, साथ ही महिलाओं का सम्पति और उत्पादन के साधनों पर भी स्वामित्व एवं नियन्त्रण भी कम होता हैं।
Keywords महिला सशक्तिकरण
Published In Volume 3, Issue 5, September-October 2021
Published On 2021-10-29
Cite This महिला सशक्तिकरण में महिला बाल विकास की भुमिका एक मुल्याकंन - डॉ. आशुतोष व्यास, राधेश्याम गमेती - IJFMR Volume 3, Issue 5, September-October 2021.

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