International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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महिला सशक्तिकरणः एक ऐतिहासिक अवलोकन

Author(s) Dr. Kamal Kant
Country India
Abstract महिला सशक्तिकरण वर्तमान समय का एक ज्वलंत मुद्दा है महिला सशक्तिकरण का अर्थ महिलाओं के सामाजिक तथा आर्थिक स्थिति में सुधार लाना है, ताकि उन्हें रोजगार, शिक्षा तथा आर्थिक तरक्की के अवसर मिल सके। समाज में महिलाओं के वास्तविक अधिकार को प्राप्त करने के लिये उन्हें सक्षम बनाना ही महिला सशक्तिकरण है।
सशक्तिकरण एक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से जागरूकता तथा बेहतर नियंत्रण के लिये प्रयास द्वारा व्यक्ति अपने विषय में निर्णय लेने के लिये समर्थ स्वतंत्र होता है। इस दृष्टिकोण से देखें तो महिला एक सर्वांगीण एवं बहुआयामी दृष्टिकोण है। यह राष्ट्र निर्माण की मुख्य धारा में महिलाओं की पर्याप्त सक्रिय भागेदारी मे विश्वास रखता है। एक राष्ट्र का सर्वांगीण एवं पूर्ण विकास तभी संभव है जब महिलाओं को समाज में उनका यथोचित स्थान व पद दिया जाये तथा उन्हें पुरूषों के साथ-साथ विकास का सहभागी माना जाये।
महिला सशक्तिकरण को समझने के लिये हमे सभी कालखंडों में उनके वैभव तथा समाज के विन्यास को समझना होगा जिस तरह से समाज में उतार चढ़ाव हुये है। उसी तरह से नारी के प्रति नजरिये में परिवर्तन आया है। सामाजिक व्यवस्था की स्पष्ट छाप भारतीय नारी पर दिखाई देती है। इतिहास के कालखण्ड कहीं उनकी वैभवगाथा से भरे हैं तो कहीं उनकी पहचान पददलित अबला नारी के रूप में हुयी है भारतीय महिलाओं की वास्तविक स्थिति को समझने के लिये हमें इतिहास के विभिन्न कालखंडों को समझना होगा। महिला सशक्तिकरण का ऐतिहासिक अवलोकन करने हेतु हम इतिहास को कई कालखंडों में विभाजित कर सकते हैं।1
1. प्राचीन काल में महिला सशक्तिकरण
2. मध्यकाल में महिला सशक्तिकरण
3. आधुनिककाल में महिला सशक्तिकरण
Keywords सशक्तिकरण, ऐतिहासिक, आन्दोलन, वैदिक, बौद्धकाल, मध्यकाल, आधुनिक युग
Field Sociology > Education
Published In Volume 7, Issue 6, November-December 2025
Published On 2025-12-21
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i06.63214

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