International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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शिक्षकों की सामाजिक संवेदनशीलता का शैक्षिक प्रतिबद्धता एवं आत्म-प्रभावकारिता पर प्रभाव का अध्ययन

Author(s) Ms. Leena Vaishnav, Prof. Dr. Chhaya SonPipare
Country India
Abstract सारांश

अध्यापन का व्यवसाय एक धर्म है तथा एक प्रतिबद्धता है। विद्या दान को सबसे श्रेष्ठ दान माना गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) में शिक्षकों के महत्व को प्रतिपादित करते हुए कहा गया है कि किसी समाज में शिक्षक का दर्जा उसके सामाजिक-सांस्कृतिक लोकाचार को प्रतिबिंबित करता है। यह भी कहा गया है कि कोई भी राष्ट्र अपने शिक्षकों के स्तर से ऊपर नहीं उठ सकता।

शिक्षक आत्म-प्रभावकारिता वह ज्ञान है, जिसके द्वारा कोई व्यक्ति किसी लक्ष्य को प्राप्त करने अथवा किसी परिस्थिति का सामना करने के लिए अपनी क्षमताओं और आत्मविश्वास के विषय में विश्वास रखता है। आत्म-प्रभावकारिता पर अल्बर्ट बंडूरा सहित कई प्रमुख मनोवैज्ञानिकों द्वारा शोध किए गए हैं, जिन्होंने सामाजिक अधिगम सिद्धांत (Social Learning Theory) का विकास किया।

प्रस्तुत अध्ययन में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के शहरी एवं ग्रामीण परिवेश से 400 शिक्षकों का चयन किया गया। चरों के मापन हेतु राठौर एवं वर्मा (2003) द्वारा निर्मित शिक्षक प्रतिबद्धता मापनी, मंगल (2017) द्वारा निर्मित शिक्षक संवेगात्मक बुद्धि मापनी तथा सिंह एवं नरसेन (2014) द्वारा निर्मित आत्म-प्रभावकारिता मापनी का प्रयोग किया गया।

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की शिक्षक प्रतिबद्धता एवं आत्म-प्रभावकारिता के मध्य सहसंबंध ज्ञात करने हेतु कार्ल-पियर्सन सहसंबंध गुणांक की गणना की गई। लिंग एवं परिवेश के आधार पर संवेगात्मक बुद्धि में अंतर के विश्लेषण हेतु ‘टी-मान’ की गणना की गई। अध्ययन के परिणामों से यह ज्ञात हुआ कि शिक्षक प्रतिबद्धता एवं आत्म-प्रभावकारिता के मध्य कोई सार्थक सहसंबंध नहीं पाया गया। तथापि यह कहा जा सकता है कि शिक्षक प्रतिबद्धता में वृद्धि होने पर आत्म-प्रभावकारिता में भी वृद्धि होती है।

अध्ययन से यह भी स्पष्ट हुआ कि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों में लिंग के आधार पर संवेगात्मक बुद्धि में कोई सार्थक अंतर नहीं पाया गया, अतः शून्य परिकल्पना स्वीकार की गई। साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ कि ग्रामीण परिवेश के शिक्षकों में शहरी परिवेश के शिक्षकों की तुलना में संवेगात्मक बुद्धि अधिक पाई जाती है।
Keywords कीवर्ड्स: प्रतिबद्धता, आत्म-प्रभावकारिता, संवेगात्मक बुद्धि, मापनी
Field Arts
Published In Volume 8, Issue 1, January-February 2026
Published On 2026-01-01
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i01.63774
Short DOI https://doi.org/hbhrc5

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