International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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ग्रामीण और शहरी छात्रों की आत्म-प्रभावकारिता व शैक्षिक उपलब्धियों पर सामाजिक-आर्थिक स्थिति का प्रभाव

Author(s) नेहा वंसल, डॉ. अंकित गंगवार
Country India
Abstract प्रस्तुत अध्ययन “ग्रामीण और शहरी छात्रों की आत्म-प्रभावकारिता एवं शैक्षिक उपलब्धियों पर सामाजिक-आर्थिक स्थिति का प्रभाव” के अंतर्गत यह विश्लेषण किया गया है कि विद्यार्थियों की सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि किस प्रकार उनकी आत्म-प्रभावकारिता तथा शैक्षिक उपलब्धि को प्रभावित करती है। आत्म-प्रभावकारिता से आशय विद्यार्थी के उस विश्वास से है जिसके माध्यम से वह यह मानता है कि वह शैक्षिक कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा कर सकता है। यह विश्वास न केवल सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है, बल्कि लक्ष्य निर्धारण, प्रयास, धैर्य एवं उपलब्धि के स्तर को भी निर्धारित करता है। सामाजिक-आर्थिक स्थिति में परिवार की आय, माता-पिता की शैक्षिक योग्यता, व्यवसाय, पारिवारिक संसाधन, आवासीय वातावरण तथा शैक्षिक सुविधाएँ सम्मिलित होती हैं, जो प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से विद्यार्थी के शैक्षिक विकास को प्रभावित करती हैं। प्रस्तुत शोध में वर्णनात्मक एवं तुलनात्मक शोध पद्धति का प्रयोग किया गया है। अध्ययन के लिए ग्रामीण एवं शहरी विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों का चयन किया गया। नमूना चयन में यादृच्छिक पद्धति अपनाई गई ताकि निष्कर्ष अधिक वस्तुनिष्ठ एवं विश्वसनीय हो सकें। आत्म-प्रभावकारिता के मापन हेतु मानकीकृत आत्म-प्रभावकारिता मापनी का प्रयोग किया गया, जबकि शैक्षिक उपलब्धि के आकलन हेतु विद्यार्थियों के वार्षिक परीक्षा अंकों अथवा मानकीकृत उपलब्धि परीक्षण का उपयोग किया गया। सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आकलन के लिए परिवार की आय, माता-पिता की शिक्षा, व्यवसाय एवं घरेलू संसाधनों से संबंधित सूचनाएँ एकत्र की गईं। प्राप्त आँकड़ों का विश्लेषण सांख्यिकीय तकनीकों के माध्यम से किया गयज्ञं ग्रामीण एवं शहरी छात्रों की तुलना करने पर यह पाया गया कि शहरी छात्रों की औसत आत्म-प्रभावकारिता एवं शैक्षिक उपलब्धि ग्रामीण छात्रों की तुलना में अधिक थी। इसका प्रमुख कारण शहरी क्षेत्रों में उपलब्ध बेहतर सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियाँ, शैक्षिक संसाधन, तकनीकी सुविधाएँ एवं अभिभावकों की उच्च शैक्षिक जागरूकता मानी जा सकती है। वहीं ग्रामीण छात्रों में प्रतिभा एवं क्षमता की कोई कमी नहीं पाई गई, बल्कि सीमित अवसर एवं संसाधन उनके शैक्षिक विकास में बाधक सिद्ध होते हैं। अध्ययन से यह निष्कर्ष निकलता है कि यदि ग्रामीण एवं निम्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को उपयुक्त शैक्षिक संसाधन, आर्थिक सहायता, परामर्श सेवाएँ एवं प्रेरणात्मक वातावरण प्रदान किया जाए, तो उनकी आत्म-प्रभावकारिता एवं शैक्षिक उपलब्धि में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। इस दृष्टि से सरकार, शैक्षिक संस्थानों, शिक्षकों एवं समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Keywords ग्रामीण और शहरी, आत्म-प्रभावकारिता, सामाजिक-आर्थिक स्थिति
Published In Volume 7, Issue 2, March-April 2025
Published On 2025-04-05

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