International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

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पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद का वर्तमान समय में प्रासंगिकता

Author(s) डॉ. सुप्रिया शालिनी
Country India
Abstract प्रस्तुत शोध-पत्र पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित एकात्म मानववाद की अवधारणा का समकालीन परिप्रेक्ष्य में विश्लेषण करता है। एकात्म मानववाद भारतीय चिंतन परंपरा पर आधारित एक ऐसी समग्र वैचारिक प्रणाली है, जो मानव जीवन के भौतिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक आयामों के संतुलित विकास पर बल देती है। यह विचारधारा पूँजीवाद और समाजवाद जैसी पाश्चात्य अवधारणाओं से भिन्न एक स्वदेशी विकास मॉडल प्रस्तुत करती है, जिसमें व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के बीच समन्वय को केंद्रीय स्थान दिया गया है। इस अध्ययन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन, व्यक्तित्व एवं वैचारिक पृष्ठभूमि का विवेचन करते हुए एकात्म मानववाद की मूल अवधारणा, उसके प्रमुख सिद्धांतों तथा भारतीय दार्शनिक परंपरा में उसके स्थान को स्पष्ट किया गया है। प्रस्तुत अध्ययन के अन्तर्गत एकात्म मानववाद केवल एक वैचारिक दर्शन नहीं, बल्कि वर्तमान समय की सामाजिक, आर्थिक और नैतिक समस्याओं के समाधान हेतु एक संतुलित एवं मानव-केंद्रित दृष्टिकोण प्रदान करता है, जिसकी प्रासंगिकता भविष्य में और अधिक बढ़ सकती है।
Keywords पं. दीनदयाल, एकात्मक मानववाद, पूँजीवाद एवं समाजवाद, नैतिक मूल्य
Published In Volume 4, Issue 5, September-October 2022
Published On 2022-09-07
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2022.v04i05.66884

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