International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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यौगिक कैप्सूल साधना का महत्व- स्वामी निरंजनानंद सरस्वती के दृष्टिकोण में

Author(s) Mr. अर्पित मीणा
Country India
Abstract यह शोध पत्र स्वामी निरंजनानंद सरस्वती द्वारा प्रतिपादित "यौगिक कैप्सूल साधना" के महत्व और व्यावहारिक उपयोगिता का विश्लेषण करता है । प्राचीन वैदिक परंपरा से उद्भूत योग, आज की जीवनशैली में कैसे समाहित किया जा सकता है, इसका समाधान कैप्सूल साधना के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है । स्वामी निरंजनानंद जी ने आधुनिक जीवन की चुनौतियों को समझते हुए योग को पांच सरल एवं प्रभावशाली खंडों में विभाजित किया है, जिन्हें "यौगिक कैप्सूल" कहा गया है । इस साधना का पहला भाग मंत्रों का जाप है, जिसमें महामृत्युंजय, गायत्री एवं दुर्गा स्तुति जैसे शक्तिशाली मंत्रों के माध्यम से शरीर, मन और आत्मा को ऊर्जा प्रदान की जाती है । दूसरा भाग योगासनों का है, जिनमें ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, कटिचक्रासन, सूर्य नमस्कार जैसे अभ्यास शामिल हैं, जो शरीर की लचक, संतुलन और स्वास्थ्य को बढ़ाते हैं । तीसरा खंड प्राणायाम पर केंद्रित है, विशेष रूप से नाड़ी शोधन और भ्रामरी प्राणायाम, जो मानसिक स्थिरता और ऊर्जा प्रवाह को नियंत्रित करते हैं । चौथा खंड योगनिद्रा है, जो मानसिक थकावट को दूर कर ताजगी एवं आंतरिक ऊर्जा प्रदान करता है । अंतिम खंड है "दिवस की समीक्षा", जिसमें आत्ममंथन द्वारा दिनभर की गतिविधियों का अवलोकन किया जाता है । यह शोध दर्शाता है कि यौगिक कैप्सूल साधना न केवल शारीरिक स्वास्थ्य, बल्कि मानसिक, प्राणिक और आत्मिक संतुलन के लिए भी अत्यंत आवश्यक है । यह एक ऐसी सरल और सुलभ पद्धति है जिसे सामान्य व्यक्ति भी अपनी दिनचर्या में शामिल कर संपूर्ण स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को प्राप्त कर सकता है । अतः यह साधना समग्र विकास और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में एक प्रभावशाली पहल है ।
Keywords यौगिक कैप्सूल,मंत्र साधना,योगासन,प्राणायाम,योगनिद्रा,दिवस की समीक्षा,आधुनिक जीवनशैली,आध्यात्मिक उन्नति,समग्र स्वास्थ्य
Field Arts
Published In Volume 8, Issue 1, January-February 2026
Published On 2026-01-20
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i01.67009

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