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E-ISSN: 2582-2160
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Volume 8 Issue 2
March-April 2026
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यौगिक कैप्सूल साधना का महत्व- स्वामी निरंजनानंद सरस्वती के दृष्टिकोण में
| Author(s) | Mr. अर्पित मीणा |
|---|---|
| Country | India |
| Abstract | यह शोध पत्र स्वामी निरंजनानंद सरस्वती द्वारा प्रतिपादित "यौगिक कैप्सूल साधना" के महत्व और व्यावहारिक उपयोगिता का विश्लेषण करता है । प्राचीन वैदिक परंपरा से उद्भूत योग, आज की जीवनशैली में कैसे समाहित किया जा सकता है, इसका समाधान कैप्सूल साधना के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है । स्वामी निरंजनानंद जी ने आधुनिक जीवन की चुनौतियों को समझते हुए योग को पांच सरल एवं प्रभावशाली खंडों में विभाजित किया है, जिन्हें "यौगिक कैप्सूल" कहा गया है । इस साधना का पहला भाग मंत्रों का जाप है, जिसमें महामृत्युंजय, गायत्री एवं दुर्गा स्तुति जैसे शक्तिशाली मंत्रों के माध्यम से शरीर, मन और आत्मा को ऊर्जा प्रदान की जाती है । दूसरा भाग योगासनों का है, जिनमें ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, कटिचक्रासन, सूर्य नमस्कार जैसे अभ्यास शामिल हैं, जो शरीर की लचक, संतुलन और स्वास्थ्य को बढ़ाते हैं । तीसरा खंड प्राणायाम पर केंद्रित है, विशेष रूप से नाड़ी शोधन और भ्रामरी प्राणायाम, जो मानसिक स्थिरता और ऊर्जा प्रवाह को नियंत्रित करते हैं । चौथा खंड योगनिद्रा है, जो मानसिक थकावट को दूर कर ताजगी एवं आंतरिक ऊर्जा प्रदान करता है । अंतिम खंड है "दिवस की समीक्षा", जिसमें आत्ममंथन द्वारा दिनभर की गतिविधियों का अवलोकन किया जाता है । यह शोध दर्शाता है कि यौगिक कैप्सूल साधना न केवल शारीरिक स्वास्थ्य, बल्कि मानसिक, प्राणिक और आत्मिक संतुलन के लिए भी अत्यंत आवश्यक है । यह एक ऐसी सरल और सुलभ पद्धति है जिसे सामान्य व्यक्ति भी अपनी दिनचर्या में शामिल कर संपूर्ण स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को प्राप्त कर सकता है । अतः यह साधना समग्र विकास और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में एक प्रभावशाली पहल है । |
| Keywords | यौगिक कैप्सूल,मंत्र साधना,योगासन,प्राणायाम,योगनिद्रा,दिवस की समीक्षा,आधुनिक जीवनशैली,आध्यात्मिक उन्नति,समग्र स्वास्थ्य |
| Field | Arts |
| Published In | Volume 8, Issue 1, January-February 2026 |
| Published On | 2026-01-20 |
| DOI | https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i01.67009 |
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E-ISSN 2582-2160
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10.36948/ijfmr
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