International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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सुलतानपुर की कृषि अर्थव्यवस्था व पर्यावरण पर हरित क्रांति का प्रभाव – एक भौगोलिक अध्ययन

Author(s) Mr. अजय कुमार, Prof. Dr. श्याम बहादुर सिंह
Country India
Abstract हरित क्रांति के प्रारम्भ होने से भारत की पारंपरिक कृषि पद्धति आधुनिक पद्धति की ओर अग्रसर हुई | सुलतानपुर जनपद में भी अधिक उपज की बीजों , रासायनिक खादों ,कीटनाशकों ,नलकूप आधारित सिंचाई एवं प्रौद्योगिकी के व्यापक प्रयोग से मुख्यतः गेहूँ एवं धान के उत्पादन में अधिक वृद्धि हुई।अधिक उत्पादन बढ़ने से कृषि संरचना में परिवर्तन हुआ,साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नयी दिशा मिली।जहाँ एक तरफ आधुनिक कृषि से आर्थिक लाभ में वृद्धि हुई ,वही दूसरी तरफ इसके पर्यावरणीय दुष्परिणाम भी सामने आने लगे ।भूजल स्तर में लगातार गिरावट ,मृदा की उर्वरता में कमी ,रासायनिक अवशेषों से प्रदूषण ,बाहरी खर-पतवारों का आगमन परम्परागत फसलों की विविधता में विलोपन पारिस्थिकीय असंतुलन जैसी समस्या लगातार बढ़ती गयी ये तथ्य यह इंगित करते है , की हरित क्रांति ने जहाँ कृषि उत्पादन , कृषि अर्थव्यस्था को तीव्र गति दी । वही पर्यावरणीय संतुलन को चुनौती भी दी । बढ़ती आबादी की खाद्यान्न पूर्ति के लिए हरित क्रांति को साथ लेकर चलना होगा, उसके लिए सतत कृषि का विकास जरुरी है। इस शोध से यह निष्कर्ष निकलता है की जनपद सुलतानपुर मे सतत कृषि विकास के लिए पर्यावरणीय अनुकूल तकनीको ,जैविक खादों ,कम जल की खपत वाली सिंचाई विधियों (स्प्रिंकलर ,ड्रिप ), को बढ़ावा देना आवश्यक है ,ताकि सभी प्रकार से संतुलन बना रहे ।
Keywords हरित क्रांति, सुलतानपुर, कृषि परिवर्तन, पर्यावरणीय चुनौतियाँ, सतत विकास
Field Arts
Published In Volume 8, Issue 1, January-February 2026
Published On 2026-01-25
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i01.67080

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