International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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आदिवासी राजनीति और औद्योगिक विस्थापन: झारखंड में विकास न्याय की पुनर्व्याख्या

Author(s) Dr. PREM PRAKASH
Country India
Abstract झारखण्ड के औद्योगिक विकास की प्रक्रिया आदिवासी जीवन और भू-संस्कृति के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। खनिज-आधारित उद्योगों और विकास परियोजनाओं ने जहाँ राज्य को निवेश और राजस्व प्रदान किया, वहीं लाखों आदिवासियों को विस्थापन, आजीविका संकट और सामाजिक विखंडन का सामना करना पड़ा। यह अध्ययन इस द्वंद्व को समझते हुए विश्लेषण करता है कि किस प्रकार झारखण्ड की आदिवासी राजनीति ने औद्योगिक विस्थापन के प्रश्न को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और न्यायसंगत अधिकारों के संघर्ष के रूप में पुनर्परिभाषित किया। "जल, जंगल, जमीन" की अवधारणा यहाँ विकास के एक वैकल्पिक प्रतिमान के रूप में उभरती है, जो संसाधन-आधारित पूंजीवादी मॉडल के विरुद्ध समुदाय-केंद्रित न्याय की मांग करती है। अध्ययन का निष्कर्ष है कि झारखण्ड में विकास तभी न्यायपूर्ण और टिकाऊ हो सकता है, जब नीति-निर्माण में आदिवासी सहभागिता, सांस्कृतिक स्वायत्तता और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को समान महत्व दिया जाए।
Keywords आदिवासी राजनीति, औद्योगिक विस्थापन, विकास न्याय, जल-जंगल-जमीन, पर्यावरणीय न्याय
Field Sociology > Politics
Published In Volume 8, Issue 2, March-April 2026
Published On 2026-04-02

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