International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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विश्व के शैक्षिक चिन्तकों का शिक्षा सम्बन्धी विचार एवं उनके प्रासंगिकता का अध्ययन

Author(s) Dr. Ram Kumar Yadav
Country India
Abstract सार-संक्षेप
समय के साथ शिक्षा का अभ्यास कई चरणों से गुजरा है। शिक्षा का प्रत्येक सिद्धान्त संयोग से वहां नहीं पहुंचा, बल्कि एक या दूसरे महान शिक्षकों ने इसे प्रस्तावित किया है। अनुभव से पैदा हुआ है, और दूसरों ने इसे अभ्यास के लायक पाया है। कुछ शिक्षकों को युवा शिक्षार्थियों के साथ मिलकर काम करना पड़। उन्हें खेल और काम पर देख रहे थे, और इसके माध्यम से सिद्धांतों को तैयार करने में सक्षम थे, जो समय की कसौटी पर खरे उतरे है। उनमें से कुछ महान मनोवैज्ञानिक थे, कुछ महान दार्शनिक थे, और कुछ जीवन के कुछ अन्य क्षेत्रों में थे जिनका संबंध शिक्षा से था।
शिक्षा दर्शन तीन प्रमुख उपकरणों में से एक है जिसका उपयोग मनुष्य जीवन के कुछ सबसे गहन प्रश्नों पर प्रकाश डालने के लिए करता है, अन्य दो विज्ञान और धर्म हैं और विज्ञान और धर्म की तरह, दर्शन में भी कई प्रतिस्पर्धी सिद्धान्त हैं। कई अलग-अलग तरीके से इसका अभ्यास किया जाता है। विश्व के दूसरी ओर भारत जैसे स्थानों में, अद्वितीय शिक्षा दर्शन अपने आप विकसित हुए थे, अपने यूरोपीय समकक्षों से पूरी तरह से अलग और बहुत अलग। भारतीय तर्क अमूर्त प्रस्तावों के बजाय अनुभूति के तर्क का एक शिक्षाप्रद उदाहरण प्रस्तुत करता है-एक तर्क जिसे विकृत नहीं किया गया है और मनोविज्ञान और ज्ञानमीमांसा से अलग रखा गया है। क्योंकि यह वास्तविक मानव का तर्क है जो यह जानने का प्रयास करता है कि क्या सच में दुनिया।
.भारतीय शैक्षिक विकाचारक आदि गुरू शंकराचार्य, रवीन्द्रनाथ टैगोर, स्वामी विवेकानन्द, गिजू भाई बघेल, महात्मा गांधी, अरिबन्दो घोष, मैरिया मांटेसरी, व परमहंस योगानन्द एवं पाश्चत्य शैक्षिक विचराको में रूसो, पेस्टालॉजी, बर्ट्रेण्ड रसेल, प्लेटो, सुकरात, जान ड्यूई, फ्रेडरिक फ्रोबेल व अरस्तू। विश्व के शैक्षिक विचारकों द्वारा दिये गये मार्गदर्शन, साहित्य हमे प्राप्त होता है, जो कि शैक्षिक, साहित्यक, मानवीय नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण है। परन्तु इस शोध के माध्यम से हम विश्व के शैक्षिक चिन्तकों के शिक्षा सम्बन्धी विचार एवं उनके प्रासंगिकता का अध्ययन करेंगें।
Keywords भारतीय शैक्षिक विकाचारक आदि गुरू शंकराचार्य, रवीन्द्रनाथ टैगोर, स्वामी विवेकानन्द, गिजू भाई बघेल, महात्मा गांधी, अरिबन्दो घोष, मैरिया मांटेसरी, व परमहंस योगानन्द एवं पाश्चत्य शैक्षिक विचराको में रूसो, पेस्टालॉजी, बर्ट्रेण्ड रसेल, प्लेटो, सुकरात, जान ड्यूई, फ्रेडरिक फ्रोबेल व अरस्तू
Field Sociology > Philosophy / Psychology / Religion
Published In Volume 8, Issue 1, January-February 2026
Published On 2026-02-05
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i01.68119

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