International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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बदलते परिवेश में गृहिणी एवं कामकाजी महिलाओं की समस्याएँ: चनपटिया प्रखंड का तुलनात्मक अध्ययन

Author(s) पूजा कुमारी, डॉ. उषा वैद्य
Country India
Abstract बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश ने भारतीय महिलाओं की भूमिकाओं को गहराई से प्रभावित किया है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ पारंपरिक मूल्य आधुनिक दबावों से टकरा रहे हैं। यह अध्ययन पश्चिम चम्पारण जिले के चनपटिया प्रखंड के संदर्भ में गृहिणी और कामकाजी महिलाओं की समस्याओं का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए, हम सामाजिक संरचनाओं, पारिवारिक दायित्वों और आर्थिक कारकों के माध्यम से इन चुनौतियों को समझते हैं। गृहिणी महिलाएँ मुख्यतः घरेलू जिम्मेदारियों और आर्थिक निर्भरता से जूझती हैं, जबकि कामकाजी महिलाएँ कार्यस्थल पर भेदभाव और दोहरी भूमिकाओं के बोझ से प्रभावित होती हैं। चनपटिया प्रखंड, जो कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था वाला क्षेत्र है, में ये समस्याएँ और भी जटिल हो जाती हैं क्योंकि यहाँ सरकारी योजनाएँ जैसे मनरेगा सक्रिय हैं, लेकिन पितृसत्तात्मक मानदंड प्रबल बने हुए हैं। इस विश्लेषण में फेमिनिस्ट सिद्धांतों का सहारा लिया गया है, जो महिलाओं की स्थिति को संरचनात्मक असमानता के रूप में चित्रित करते हैं। गृहिणी महिलाओं की प्रमुख कठिनाइयाँ आर्थिक अलगाव, स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे और शिक्षा की कमी हैं, जो बदलते जलवायु और बाजार दबावों से बढ़ जाती हैं। दूसरी ओर, कामकाजी महिलाएँ कम वेतन, सुरक्षा चिंताओं और कार्य-जीवन संतुलन की समस्या से ग्रस्त हैं। तुलनात्मक रूप से, दोनों वर्गों में लैंगिक भूमिकाओं का दबाव समान है, लेकिन गृहिणी महिलाओं की निर्भरता अधिक गहन गरीबी और सामाजिक हाशिएकरण को जन्म देती है, जबकि कामकाजी महिलाएँ आर्थिक सशक्तिकरण प्राप्त करने के बावजूद भावनात्मक थकान का सामना करती हैं। डिजिटल विभाजन और परिवहन की कमी जैसे कारक चनपटिया के स्थानीय संदर्भ में इन समस्याओं को और तीव्र बनाते हैं।
यह अध्ययन न केवल इन समस्याओं की पहचान करता है, बल्कि सामाजिक न्याय के लिए नीतिगत सुझाव भी देता है, जैसे जागरूकता अभियान, कौशल विकास और लैंगिक संवेदनशीलता प्रशिक्षण। सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप, चनपटिया जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की सशक्तिकरण से समग्र सामाजिक प्रगति संभव है। यह विश्लेषण भविष्य के गहन अध्ययनों के लिए आधार प्रदान करता है, जो लैंगिक समानता को मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध होगा। कुल मिलाकर, बदलते परिवेश में महिलाओं की चुनौतियाँ संरचनात्मक परिवर्तन की मांग करती हैं, ताकि वे पूर्ण क्षमता से योगदान दे सकें।
Published In Volume 8, Issue 1, January-February 2026
Published On 2026-02-08

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