International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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वॉकल फार लोकल महेष्वर हथकरघा उद्योग एवं बकावां षिवलिंग हस्तषिल्प कला का व्यैक्तिक अध्ययन खरगोन जिले के विषेष सन्दर्भ में

Author(s) Dr. Rajaram Arya
Country India
Abstract वॉकल फॉर लोकल संकल्प से देष और प्रदेष आत्मनिर्भर बनेगा, ;ैमस.ित्मसपंदबमद्ध आयात पर निर्भरता कम होगी, देष आर्थिक रूप से सषक्त बनेगा, स्थानीय उद्योगों और ;ठववेज स्वबंस प्दकनेजतपमेद्ध कारीगरों, डैडम्े तथा छोटे व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा । साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन ;म्उचसवलउमदज ळमदमतंजपवदद्ध होगा और उत्पादन बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे ।
हस्तषिल्प कला षिवलिंग का बहुत महत्व है। हिन्दू धर्म में षिवलिंग की पूजा को सर्वोच्च माना जाता है और यह भगवान षिव के निराकार स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता है। हस्तषिल्प कला के माध्यम से बनाए गए षिवलिंग का महत्व कई दृष्टिकोण से है। यह आध्यात्मिक और कलात्मक दृष्टि से निमाड़ की पहचान दिलाता है।ं देवी अहिल्या भगवान षिव की अनन्य भक्त थी।
चुनौतियों का समाधान करके और उपलब्ध संभावनाओं का उपयोग करके हस्तषिल्प षिवलिंग कला को संरक्षित और प्रोत्साहन दिया जा सकता है।
दोनों ही हस्तषिल्प कलाएं निमाड़ का गौरव है,जो अनेक चुनौतियां का सामना कर रही है। इनका समाधान करके उचित सरकारी और सामाजिक समर्थन प्रदान करके, महेष्वर हस्तषिल्प और हथकरघा कला की समृध्द विरासत को संरक्षित किया जा सकता है,और कारीगरों के लिए स्थायी आजीविका सुनिष्चित की जा सकती है।
यदि हस्तषिल्पकारों को उचित तकनीकी प्रषिक्षण और सीधे बाजार से जुड़ने का अवसर मिले,तो हस्तषिल्प षिवलिंग कला न केवल जीवित रहेगी, बल्कि एक आकर्षक व्यवसाय के रूप में भी उभरेगी ।
माहेष्वरी हैंडलूम व्यवसाय न केवल कला और संस्कृति का प्रतीक है,बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए आर्थिक सुरक्षा और सतत विकास का एक महत्वपूर्ण साधन भी है। यह व्यवसाय सांस्कृतिक विरासत और पहचान, आर्थिक महत्व और रोजगार सृजन, अनूठी कारीगरी और गुणवत्ता, पर्यावरण के अनुकूल और पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक है।
महेष्वर हथकरघा उद्योग की अनुमानित लागत एवं आय (प्रति साड़ी/इकाई) 2000 रू.से 3000 के बीच आती है। वहीं अनुमानित आय/विक्रय मूल्य 1500 रू.से 3800 रू. या इससे अधिक तक हो सकती है,जो डिजाइन और सामग्री पर निर्भर करता है।
Keywords वॉकल, लोकल, स्वदेषी, आत्मनिर्भर, हस्तषिल्प, सषक्त, ई-कामर्स, वैष्विक बाजार, अष्ट अंगुल,नर्मदेषवर
Field Arts
Published In Volume 8, Issue 1, January-February 2026
Published On 2026-02-21

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