International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा की काव्य-रचनाओं में स्त्री-चेतना और लैंगिक संवेदनशीलता: एक तुलनात्मक अध्ययन

Author(s) Manoj Dandotiya, Dr. Nishu Sharma
Country India
Abstract यह शोध-पत्र हिंदी साहित्य के छायावादी युग के दो प्रमुख कवियों—सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ एवं महादेवी वर्मा—की काव्य-रचनाओं में निहित स्त्री-चेतना और लैंगिक संवेदनशीलता का तुलनात्मक एवं आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि इन दोनों कवियों ने स्त्री-अस्तित्व, अस्मिता, पीड़ा, संघर्ष और सामाजिक संरचनाओं के प्रति अपनी दृष्टि को किस प्रकार काव्यात्मक अभिव्यक्ति प्रदान की है।
यह शोध गुणात्मक एवं तुलनात्मक पद्धति पर आधारित है, जिसमें प्राथमिक स्रोत के रूप में दोनों कवियों की प्रमुख काव्य-रचनाओं तथा द्वितीयक स्रोत के रूप में साहित्यिक आलोचनाओं एवं समकालीन स्त्री-विमर्श संबंधी अध्ययनों का उपयोग किया गया है। विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि निराला के काव्य में स्त्री का चित्रण सामाजिक यथार्थ, श्रम, शोषण और विद्रोह के संदर्भ में उभरता है, जहाँ स्त्री एक सक्रिय, संघर्षशील और आत्मसम्मान से युक्त व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत होती है। इसके विपरीत, महादेवी वर्मा के काव्य में स्त्री-चेतना अधिक अंतर्मुखी, संवेदनात्मक एवं आध्यात्मिक आयामों में व्यक्त होती है, जिसमें करुणा, विरह, मौन पीड़ा और आत्म-अनुभूति का गहन स्वर निहित है।
अध्ययन यह भी दर्शाता है कि दोनों कवियों की भिन्न अभिव्यक्ति शैलियाँ—एक ओर यथार्थवादी और प्रतिरोधात्मक, तथा दूसरी ओर प्रतीकात्मक और भावप्रधान—मिलकर हिंदी साहित्य में स्त्री-विमर्श को बहुआयामी बनाती हैं। इस प्रकार, यह शोध न केवल साहित्यिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है, बल्कि समकालीन लैंगिक समानता एवं सामाजिक न्याय के विमर्श में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
Keywords स्त्री-चेतना, लैंगिक संवेदनशीलता, निराला, महादेवी वर्मा, स्त्री-विमर्श, हिंदी काव्य, नारी-अस्मिता
Published In Volume 7, Issue 1, January-February 2025
Published On 2025-01-08

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