International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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भारत @ 100 वर्ष : चिप हो या शिप सब हो स्वदेशी

Author(s) Dr. Sachin Kumar Verma
Country India
Abstract स्वतंत्रता प्राप्ति से ही देश विदेशी शस्त्रों पर निर्भर रहा, जिसका प्रमुख कारण स्वदेशी उत्पादन की सीमित मात्रा थी। इससे न केवल विदेशी मुद्रा भण्डार में कमी आयी बल्कि भू-राजनीतिक तनाव के दौरान जब दूसरे देशों से आयात की कमी या आपूर्ती बाधित हो जाने से भारत को विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस परिस्थिति को परिवर्तित करने के लिए भारत सरकार ने रक्षा खरीद प्रक्रिया (DPP) परिवर्तन किया। 2016 के, रक्षा खरीद प्रक्रिया (DPP) के स्थान पर 2020 में, रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) को प्रारम्भ किया। 2020 में, रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) में, पारदर्शिता, सरलीकरण और स्थानिय उत्पाद को प्राथमिकता दी गयी। जिसमें यह निर्धारित किया गया कि 50% से कम स्वदेशी सामग्री न हो। 25 सितम्बर 2014 को Make In India(MII) पहल प्रारम्भ हुआ।Make In India कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रक्षा क्षेत्र से सम्बन्धित कम्पनीयों को उन्नत रक्षा तकनीकी के प्रारूप कार्य करने के लिए प्रोत्साहित कर के आयात की निर्भता को कम किया जा सके। रही बात चिप्स और सेमीकण्डक्टर की तो, चिप्स और सेमीकण्डक्टर किसी भी राष्ट्र की तकनीकी की मष्तिष्क होती है, ये उपकरण मशीनों, कम्प्युटर, मोबाइल, ऑटो मोबाइल, परमाणु संयत्रों, रक्षा से सम्बन्धित उपकणों जैसे- वायुयान, लड़ाकू विमान, रॉकेट, जहाज, पनडुब्बी, राडार, सोनार, लेडार आदि का संचालन इसके बिना सम्भव नहीं है। आधुनिक युग में या यूं कहें की 21वीं में तकनीकी ही सर्वोपरि होगी। इस तकनीकी के बिना किसी भी कार्य का सम्पादन सम्भव नहीं है। जिस देश के पास जितनी तकनीकी क्षमता होगी वह देश उतना ही अधिक विकसित होगा। किसी भी देश की अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा उत्पादित चिप्स और सेमीकण्डक्टर से ज्ञात होती है कि उस राष्ट्र की विकास गति कितनी है। भारत की बात की जाए तो एक विकासशील राष्ट्र है, यह चिप्स और सेमीकण्डक्टर छोटे पैमाने पर उत्पादन कर रहा है। उत्पादन की कमी और मांग की अधिकता के कारण हमें दूसरे देशों पर निर्भता रखनी पड़ती है। इस वर्ष (2026) में चार कम्पनीयां चिप्स और सेमीकण्डक्टर का वाणिज्यीक उत्नादन प्रारम्भ करेंगी जो तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए भारत की कोशिश में मील का पत्थर होगा। माइक्रोन, ब्ळ पॉवर, केन्स तकनीकी और टाटा इलेक्ट्रॉनिक इस वर्ष वाणिज्यीक उत्पादन करेगा। ताइवान, जापान और द. कोरिया, भारत के सेमीकण्डक्टर इकोसिस्टम में उत्सुकता जताई है। CG पॉवर, केन्स तकनीकी ने वर्ष (2026)(यलट उत्पादन प्रारम्भ किया।
Keywords विक्रम 3201, SMART, SiC, सुदर्शन चक्र, IACCS, QKD
Field Sociology > Intelligence / Security
Published In Volume 8, Issue 2, March-April 2026
Published On 2026-03-09
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i02.70437

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