International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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महादेव गोविंद रानाडे, एक महान व्यक्तित्व

Author(s) Dr. Rajesh Sakwar
Country India
Abstract शोध सार
भारतीय इतिहास में नयी जाग्रति के जनक महादेव गोविंद रानडे जिन्होंने भारत के विकास के क्षेत्र में राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक सभी क्षेत्रों में अपने चिंतन से उदारवादी विचारों से सभी के मंगल की कामना की एवं आदान-प्रदान एवं समझौते के मार्ग का समर्थन कर वैधानिक उदारवादी आंदोलन के प्रेरक बने। महादेव रानडे एक विख्यात विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, इतिहासकार, समाज सुधारक एवं शिक्षाविद् थे। जिस समय में रानडे राष्ट्र के द्वारा सम्मानित राजनीतिक नेता और भारतीय अर्थशास्त्र के प्रवर्तक के रूप में उबरे उसी अवधि में वह भारत के समाज सुधारक के रूप में एवं एक महान विचार के रूप में आमजन के सामने आये। बंबई शहर पाश्चात्य शिक्षा का एक केंद्र बन चुका था। उसमें पाश्चात्य ढंग का जीवन यापन प्रारंभ हो गया था। उसके कारण नये विचार महाराष्ट्र के अन्य भागों में प्रसारित होने लगे थे। महादेव गोविंद रानडे समाज सुधार के महानतम समर्थक थे एवं विधवाओं के पुनर्विवाह के पक्षधर थे। सामाजिक दृष्टि से स्त्रियों की हेय दशा के लिए रानडे ने बाह्य आक्रमणकारियों को उत्तरदायी बताया। विधवाओं के पुनर्विवाह के क्षेत्र में रानडे हमेशा सक्रिय रहे और उनका मानना था कि राजनीतिक मुक्ति के लिए भी सामाजिक प्रगति आवश्यक है। रानडे, राजा राममोहन राय की भाँति सामाजिक सुधारों की दृष्टि से इस कारण उचित मानते थे कि इसके द्वारा निष्क्रिय सुधारात्मक अधिक सक्रिय हो उठता है। महादेव गोविंद रानडे के विचारों में संविधानवादी, राजनीति, विवेकवादी मूल्यों की स्थापना, व्यक्ति के अधिकारों का समर्थन सामाजिक आदर्शवाद, नैतिक राजनीतिक पर बल आर्थिक शोषण के विरुद्ध मुखर वैचारिक संघर्ष के रूप में उनकी भूमिका महानतम थी। अपने छोटे से आपेक्ष रहित जीवन में इस महान पुरुष ने नैतिक विधिसम्मत, विवेकवादी सुधारवादी धर्म निरपेक्ष एवं आर्थिक यथार्थता पर आधारित राष्ट्रवाद की मध्यमार्गी राजनीति का सूत्रपात किया।
Keywords विधिसम्मत, विभूतियाँ , शुद्धिकरण, इहलौकिक, निर्भिकतापूर्वक, सत्यनिष्ठा ।
Field Arts
Published In Volume 8, Issue 2, March-April 2026
Published On 2026-03-10

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