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E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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आधुनिक हिंदी साहित्य में युवा चेतना: संघर्ष, असंतोष और परिवर्तन की आकांक्षा

Author(s) Mr. मनोज कुमार पटेल
Country India
Abstract “आधुनिक हिंदी साहित्य में युवा चेतना: संघर्ष, असंतोष और परिवर्तन की आकांक्षा” विषय आधुनिक हिंदी साहित्य में युवाओं की सामाजिक, सांस्कृतिक तथा वैचारिक भूमिका को समझने का प्रयास करता है। आधुनिक युग में युवा वर्ग समाज का सबसे सक्रिय और संवेदनशील वर्ग माना जाता है, जो अपने समय की समस्याओं, असमानताओं और विसंगतियों के प्रति सजग रहता है। हिंदी साहित्य में यह युवा चेतना विभिन्न रूपों में अभिव्यक्त होती है-कभी संघर्ष के रूप में, कभी असंतोष के रूप में और कभी सामाजिक परिवर्तन की तीव्र आकांक्षा के रूप में। आधुनिक हिंदी साहित्य के अनेक कवियों, कथाकारों और उपन्यासकारों ने युवाओं की मनोदशा, उनके आक्रोश, उनकी आकांक्षाओं और उनके सामाजिक दायित्वों को अपने साहित्य में सशक्त रूप से अभिव्यक्त किया है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर से लेकर समकालीन समय तक साहित्य में युवा शक्ति को परिवर्तन के वाहक के रूप में देखा गया है। यह साहित्य युवाओं के भीतर मौजूद विद्रोही चेतना, सामाजिक अन्याय के प्रति असंतोष तथा एक न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज की स्थापना की इच्छा को उजागर करता है। आज के वैश्वीकरण, तकनीकी विकास और बदलते सामाजिक मूल्यों के दौर में युवाओं की चेतना और भी जटिल तथा बहुआयामी हो गई है। आधुनिक हिंदी साहित्य इन परिवर्तनों को प्रतिबिंबित करते हुए युवाओं की समस्याओं, उनके संघर्षों और उनके सपनों को सामने लाता है। इस प्रकार हिंदी साहित्य केवल समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि युवाओं में सकारात्मक परिवर्तन और सामाजिक जागरूकता उत्पन्न करने का एक प्रभावी माध्यम भी बनता है। यह अध्ययन आधुनिक हिंदी साहित्य में व्यक्त युवा चेतना के विभिन्न आयामों का विश्लेषण करते हुए यह स्पष्ट करने का प्रयास करता है कि साहित्य किस प्रकार युवाओं के संघर्ष, असंतोष और परिवर्तन की आकांक्षा को अभिव्यक्ति प्रदान करता है तथा समाज में नई सोच और नई दिशा का निर्माण करता है।
Keywords युवा चेतना, आधुनिक हिंदी साहित्य, संघर्ष और असंतोष, सामाजिक परिवर्तन, युवा आकांक्षाएँ
Field Sociology > Linguistic / Literature
Published In Volume 8, Issue 2, March-April 2026
Published On 2026-03-11

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