International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

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वर्तमान भारतीय शिक्षा में डॉ. जाकिर हुसैन के शिक्षा दर्शन की प्रासंगिकता

Author(s) Santosh, Dr. Farah Mehar
Country India
Abstract शिक्षा और मानव जीवन का जन्म-जन्मांतर से गहरा संबंध रहा है। शिक्षा आंतरिक वृद्धि और विकास की एक सतत एवं कभी न समाप्त होने वाली प्रक्रिया है, जिसकी अवधि जन्म से मृत्यु तक फैली होती है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य को सच्चा मानव बनाना तथा उसके जीवन को प्रगतिशील, सांस्कृतिक एवं सभ्य बनाना है। यह न केवल व्यक्ति, बल्कि पूरे समाज के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
शिक्षा के माध्यम से ही मनुष्य अपनी विचार शक्ति, तर्क क्षमता, समस्या-समाधान कौशल तथा बौद्धिकता का विकास करता है। साथ ही, यह उसकी प्रतिभा, रुचियों, सकारात्मक भावनाओं और कार्यकुशलता को भी निखारती है तथा उसमें अच्छे मूल्य और संस्कार स्थापित करती है।
किन्तु भारत की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था अनेक समस्याओं से ग्रस्त है। छात्रों में बढ़ती अनुशासनहीनता तथा अध्यापकों में अपने उत्तरदायित्वों के प्रति गंभीरता की कमी जैसी समस्याएँ चिंताजनक हैं। इन समस्याओं ने न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित किया है, बल्कि मानवता के मूल्यों को भी कमजोर किया है, जिससे राष्ट्र के चिंतकों और बुद्धिजीवियों में चिंता व्याप्त है।
Keywords शिक्षा, मानव जीवन, आंतरिक विकास, सतत प्रक्रिया, जीवनपर्यंत शिक्षा, सांस्कृतिक विकास, सामाजिक विकास, विचार शक्ति, तर्क क्षमता, समस्या-समाधान कौशल, बौद्धिकता ।
Published In Volume 8, Issue 2, March-April 2026
Published On 2026-03-27
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2026.v08i02.72779

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