International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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भारत में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और पर्यावरणीय स्थिरता: वित्तीय प्रदर्शन और बाजार मूल्यांकन का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Author(s) Dr. Mrityunjai Singh
Country India
Abstract कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) अब परोपकार की पारंपरिक सीमाओं को पार कर वाणिज्य और पर्यावरणीय स्थिरता के एक महत्वपूर्ण मिलन बिंदु के रूप में उभरा है। भारतीय कॉर्पोरेट परिदृश्य में, जहाँ 'कंपनी अधिनियम 2013' के तहत CSR अनिवार्य है, यह अध्ययन CSR व्यय, पर्यावरणीय प्रथाओं और फर्म के वित्तीय प्रदर्शन के बीच जटिल संबंधों की गहन जांच करता है। शोध का मुख्य उद्देश्य यह विश्लेषण करना है कि क्या पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में की गई पहल केवल एक विनियामक अनुपालन (Regulatory Compliance) है या यह वास्तव में दीर्घकालिक शेयरधारक मूल्य सृजन (Shareholder Value Creation) का एक रणनीतिक उपकरण है। पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन (ESG) मेट्रिक्स का उपयोग करते हुए, यह अध्ययन भारत की शीर्ष सूचीबद्ध कंपनियों के पैनल डेटा पर सांख्यिकीय मॉडलिंग और रिग्रेशन विश्लेषण (Regression Analysis) लागू करता है। शोध पद्धति के अंतर्गत फर्म के आकार, ऋण अनुपात (Leverage) और उद्योग-विशिष्ट चरों को नियंत्रित करते हुए, वित्तीय प्रदर्शन के मापदंडों जैसे कि Tobin’s Q, Return on Assets (ROA), और Return on Equity (ROE) पर CSR निवेश के प्रभाव का आकलन किया गया है। अध्ययन के परिणाम यह संकेत देते हैं कि जो कंपनियां पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार प्रथाओं को अपनाती हैं, वे न केवल उच्च 'प्रतिष्ठा पूंजी' (Reputation Capital) अर्जित करती हैं, बल्कि उनके बाजार मूल्यांकन (Market Valuation) में भी सकारात्मक सुधार देखा गया है। सांख्यिकीय निष्कर्ष यह पुष्टि करते हैं कि CSR और फर्म प्रदर्शन के बीच एक महत्वपूर्ण सकारात्मक सहसंबंध (Positive Correlation) मौजूद है, बशर्ते इन पहलों को मुख्य व्यावसायिक रणनीति के साथ एकीकृत किया गया हो। यह शोध नीति निर्माताओं, कॉर्पोरेट लीडर्स और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करता है, जो भारत में एक टिकाऊ व्यापारिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण हेतु वित्तीय लक्ष्यों और सामाजिक-पर्यावरणीय उत्तरदायित्वों के बीच संतुलन स्थापित करने की वकालत करता है।
Published In Volume 3, Issue 3, May-June 2021
Published On 2021-05-08
DOI https://doi.org/10.36948/ijfmr.2021.v03i03.74286

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