International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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भारत में बुजुर्गों के भरण-पोषण के अधिकारों की सुरक्षा: रिवर्स मॉर्गेज योजना, 2008 का एक आलोचनात्मक विश्लेषण

Author(s) Prof. Dr. Ashok Kumar Sonkar, Mr. Deepak
Country India
Abstract हाल ही के कुछ वर्षाे में, भारत के बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ी है। शहरीकरण, बदलती जीवनशैली और परिवार का आपसी सहयोग कमजोर होने के कारण कई बुजुर्गों को आर्थिक असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। अतः बुजुर्गों को प्रभावी कानूनी और आर्थिक सुरक्षा देना बेहद जरूरी हो गया है। एक्ट, 2007 बुजुर्गों को भरण-पोषण का कानूनी अधिकार देता है। फिर भी, बुजुर्गों के लिए आर्थिक सुरक्षा की पूर्ण सुनिश्चितता सम्भव नहीं हो पाई है। इस समस्या के समाधान के तौर पर, एक वैकल्पिक आर्थिक साधन के रूप में रिवर्स मॉर्गेज स्कीम, 2008 शुरू की गई है। यह योजना वरिष्ठ नागरिकों को अपनी रिहायशी संपत्ति को आय के स्रोत में बदलने का मौका देती है। इस योजना के अन्तर्गत, रिहायशी संपत्ति पर कर्ज लेने वाला व्यक्ति अर्थात् बुजुर्ग घर में ही रहता है। और उसको मॉर्गेज की सम्पत्ति की राशि मिलती रहती है। बुजुर्ग व्यक्ति के जीवनकाल में घर का मालिकाना हक उसी के पास रहता है। हालाँकि, भारत में यह योजना ज्यादा सफल नहीं रही है। जागरूकता की कमी इसकी एक बड़ी वजह हो सकती है। हमारी सांस्कृतिक मान्यताएँ भी बुजुर्गों को अपना घर गिरवी रखने से रोकती हैं। इसकी जटिल प्रक्रियाएँ, लोकप्रियता को कम कर देती हैं। यह लेख योजना के संभावित लाभों और उसकी व्यावहारिक सीमाओं, दोनों का विश्लेषण करता है।
Keywords मुख्य शब्द: रिवर्स मॉर्गेज योजना, 2008, वरिष्ठ नागरिक, भरण-पोषण के अधिकार, आर्थिक सुरक्षा, भारत का संविधान।
Field Sociology > Administration / Law / Management
Published In Volume 8, Issue 3, May-June 2026
Published On 2026-05-02

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