International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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समाज में मूल्यों का संगठन और संरचना

Author(s) Dr. मीनाक्षी मीना
Country India
Abstract सामाजिक संबंधों को दिशा प्रदान करते हैं। यह शोध-पत्र समाज में मूल्यों के संगठन (व्तहंदप्रंजपवद) और संरचना ;ैजतनबजनतम) का विश्लेषण करता है। इसमें यह बताया गया है कि किस प्रकार मूल्य समाज के विभिन्न स्तरोंकृव्यक्ति, समूह और संस्थाओं-में व्यवस्थित होते हैं तथा सामाजिक स्थिरता और परिवर्तन में भूमिका निभाते हैं।
यह सच है कि समाज में आज हम एक औद्योगिक एवं भौतिकवादी संस्कृति में जीवन व्यतीत कर रहे हैं जिससे मनुष्य भावनाहीन होकर तार्किक आधार पर और लाभ-हानि की कसौटी पर ही सभी प्रकार के व्यवहार करता है। इस प्रकार कहा जा सकता है आज हम व्यक्तिवादिता एवं प्रतियोगिता वाले समाज में रह रहे हैं। लेकिन इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरणों की कमी नहीं रही है कि जब व्यक्ति ने उन सिद्धान्तों और विचारों को बनाये रखने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया जिन्हें समाज में महत्वपूर्ण समझा जाता रहा है। राम ने पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए स्वेच्छा से चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार कर लिया। गौतम बुद्ध ने केवल सत्य की खोज करने लिए सम्पूर्ण राज्य का परित्याग कर दिया जबकि स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान सैकड़ों क्रांतिकारियों ने देष की स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन की आहुति दे दी। इसके अतिरिक्त सामान्य जीवन में भी ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो कुछ विषेष मूल्यों के लिए जीवित रहते हैं तथा इन मूल्यों को बनाये रखने के लिए बड़ी से बड़ी हानि उठाने को भी सहन करने लिए तत्पर रहते हैं। प्राकृतिक आपदा जैसी घटनाक्रम में जैसा कि कोरोना वायरस ;ब्वअपक.19द्ध के समय व्यक्ति अन्य व्यक्तियों की सेवा करने में जुट गये यह भी एक प्रकार मूल्य की ही भावना है। इसका तात्पर्य यह है कि प्रत्येक समाज के अपने कुछ लक्ष्य, आदर्ष तथा मानदण्ड होते हैं जिनके आधार पर व्यक्ति विभिन्न घटनाओं और व्यवहारों का मूल्यांकन करता है। इस दृष्टिकोण से मूल्य एक तरह के समाजिक मानदण्ड हैं जो हमारे लिए एक विषेष अर्थ रखते हैं और जिन्हें हम सामाजिक जिवन के लिए महत्वपूर्ण समझते हैं। यही मूल्य इस बात का निर्धारण करते हैं कि व्यक्ति के लिए कौन-सा व्यवहार नैतिक है और कौन-सा अनैतिक, क्या अच्छा है और क्या बुरा, पाप और पुण्य क्या है तथा समाज व्यक्ति से किस तरह के व्यवहारों की आषा करता है ? इस प्रकार कहा सकता है कि मूल्य समाज की आत्मा है अर्थात समाज मूल्यों का संगठन है। मूल्य के अभाव में समाज जीवित नहीं रह सकता, जिस प्रकार यदि शरीर में से आत्मा को निकाल दिया जाता है तो शरीर मर जाता है उसी प्रकार यदि समाज में से सामाजिक मूल्य को निकाल दिया जाए तो समाज का अस्तित्व खत्म हो जायेगा।
Keywords लक्ष्य, आदर्ष नियम, मानदण्ड, आत्मिक स्वीकृति, सार्वभौमिक, सामूहिक प्रतिनिधित्व, प्रतीकात्मक भावना
Published In Volume 3, Issue 2, March-April 2021
Published On 2021-04-08

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