International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

A Widely Indexed Open Access Peer Reviewed Multidisciplinary Bi-monthly Scholarly International Journal

Call for Paper Volume 8, Issue 4 (July-August 2026) Submit your research before last 3 days of August to publish your research paper in the issue of July-August.

वैश्विक भू-राजनीति के बदलते आयाम, अमेरिका और ईरान के संर्घष के संदर्भ में

Author(s) बीबी सफीना
Country India
Abstract वैश्विक भू-राजनीति के बदलते आयामों में अमेरिका-ईरान संघर्ष एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो रहा है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंध आज प्रत्यक्ष सैन्य टकराव तक पहुंच गए हैं। फरवरी 2026 में शुरू हुए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम, सैन्य ठिकानों और नेतृत्व को लक्षित किया, जिससे क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ा और वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुए। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की अस्थायी बंदी ने विश्व अर्थव्यवस्था को झटका दिया, तेल की कीमतें बढ़ीं और चीन, रूस जैसे शक्तियों को नए अवसर मिले।
यह संघर्ष केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि बहुधरुवीय विश्व व्यवस्था के उदय, ऊर्जा सुरक्षा, परमाणु प्रसार और क्षेत्रीय गठबंधनों का प्रतिबिंब है। अमेरिका अपनी वैश्विक चतपउंबल बनाए रखने के लिए अधिकतम दबाव की नीति अपनाता है, जबकि ईरान क्षेत्रीय प्रभाव और प्रतिरोध की रणनीति पर जोर देता है। परिणामस्वरूप, मध्य पूर्व में नई संरेखण हो रहे हैं - सऊदी अरब, यूएई जैसे देश संतुलन साध रहे हैं, जबकि चीन और रूस अवसरवादी भूमिका निभा रहे हैं।
यह अध्ययन भू-राजनीतिक परिवर्तनों, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सैन्य-आर्थिक प्रभावों और भविष्य की संभावनाओं का विश्लेषण करता है। यह दर्शाता है कि अमेरिका-ईरान टकराव बहुपक्षीय विश्व में शक्ति संक्रमण का प्रतीक है, जहां पारंपरिक पश्चिमी वर्चस्व चुनौतीपूर्ण हो रहा है। शांति के लिए कूटनीति, क्षेत्रीय सहयोग और परमाणु समझौते आवश्यक हैं, अन्यथा संघर्ष वैश्विक अस्थिरता बढ़ा सकता है।
Keywords वैश्विक भू-राजनीति, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, मध्य पूर्व पुनर्संरचना, परमाणु प्रसार एवं बहुधरुवीय विश्व व्यवस्था इत्यादि
Published In Volume 8, Issue 3, May-June 2026
Published On 2026-05-12

Share this