International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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टैगोर के शिक्षा दर्शन में अंतरराष्ट्रीयता की अवधारणा

Author(s) Amar Bahadur
Country India
Abstract सार (Abstract)
रवींद्रनाथ टैगोर आधुनिक भारत के एक प्रमुख दार्शनिक, शिक्षाविद और वैश्विक विचारक थे, जिनकी शिक्षा संबंधी दृष्टि में "अंतर्राष्ट्रीयता" एक मूल तत्व के रूप में निहित है। उनके अनुसार, शिक्षा अपने आप में एक लक्ष्य नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य मानवता, सह-अस्तित्व और वैश्विक एकजुटता की भावना को विकसित करने में योगदान देना है। टैगोर शिक्षा को एक ऐसी प्रक्रिया के रूप में देखते थे जो सीमाओं से परे जाकर व्यक्ति को विश्व नागरिक बनाती है।
इस शोधपत्र का उद्देश्य टैगोर के शिक्षा दर्शन में निहित अंतर्राष्ट्रीयता की अवधारणा का विश्लेषण करना और वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में इसकी प्रासंगिकता को समझना है। यह अध्ययन गुणात्मक पद्धति पर आधारित है और टैगोर के शैक्षिक विचारों, ग्रंथों और समकालीन व्याख्याओं का विश्लेषण करता है। अध्ययन से पता चलता है कि टैगोर की अंतर्राष्ट्रीयता की अवधारणा संकीर्ण राष्ट्रवाद का सार्वभौमिक और मानवीय प्रतिरूप है। बढ़ते वैश्वीकरण के युग में, ऐसा विचार शिक्षा प्रणाली को अधिक मानवतावादी, सहिष्णु और सहयोगात्मक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Keywords मुख्य शब्द: रवीन्द्रनाथ टैगोर, शिक्षा-दर्शन, अंतरराष्ट्रीयता, मानवतावाद, विश्व-बंधुत्व, वैश्वीकरण
Field Sociology > Philosophy / Psychology / Religion
Published In Volume 8, Issue 3, May-June 2026
Published On 2026-05-22

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