International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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बिहार में पहचान की राजनीति: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Author(s) विकाश कुमार विधाता
Country India
Abstract बिहार की राजनीति लंबे समय से पहचान आधारित विमर्शों के इर्द-गिर्द विकसित होती रही है, जिसमें जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्रीयता प्रमुख कारक रहे हैं। यह अध्ययन बिहार में पहचान की राजनीति के स्वरूप, विकास और उसके सामाजिक-राजनीतिक प्रभावों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। स्वतंत्रता के बाद प्रारंभिक दशकों में राजनीति पर उच्च जातियों का प्रभुत्व रहा, किंतु 1990 के दशक में मंडल आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद सामाजिक न्याय की राजनीति ने नई दिशा प्राप्त की। इस परिवर्तन ने पिछड़ी और दलित जातियों को राजनीतिक रूप से सशक्त किया और सत्ता संरचना में उनका प्रतिनिधित्व बढ़ा। इस आलेख में यह देखा गया है कि पहचान की राजनीति ने एक ओर सामाजिक न्याय, प्रतिनिधित्व और राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा दिया, वहीं दूसरी ओर यह सामाजिक विभाजन, धु्रवीकरण और विकासात्मक मुद्दों से ध्यान भटकाने का कारण भी बनी। धार्मिक पहचान, विशेषकर मुस्लिम समुदाय की राजनीति, भी बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके अतिरिक्त, क्षेत्रीय असमानताएं और भाषा आधारित पहचान भी राजनीतिक विमर्श को प्रभावित करती हैं। बिहार में पहचान की राजनीति एक दोधारी तलवार के समान है, जो सशक्तिकरण और विभाजन दोनों को जन्म देती है। अतः आवश्यक है कि पहचान आधारित राजनीति को समावेशी विकास, सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ संतुलित किया जाए। यह शोध नीति-निर्माताओं और विद्वानों के लिए उपयोगी दृष्टिकोण प्रदान करता है।
Keywords सामाजिक न्याय, प्रतिनिधित्व, राजनीतिक भागीदारी, समावेशी विकास, सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक मूल्य आदि
Published In Volume 4, Issue 6, November-December 2022
Published On 2022-12-03

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