International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160     Impact Factor: 9.24

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उरांव जनजाति के लोकगीत: संचार के परंपरागत माध्यम का अध्ययन

Author(s) विकाश कुमार, डॉ. आशुतोष मंडावी
Country India
Abstract यह शोध-पत्र छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के बगीचा ब्लॉक के अंतर्गत छिपतला गाँव के विशेष संदर्भ में उरांव जनजाति के लोकगीतों का 'पारंपरिक संचार माध्यम' के रूप में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। द्रविड़ भाषा-परिवार से संबंधित कुड़ुख भाषी उरांव जनजाति छत्तीसगढ़ के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में प्रमुखता से निवास करती है। प्रस्तुत अध्ययन में उरांव समाज के विभिन्न लोकगीतों—संस्कार गीत (जन्म, विवाह, मृत्यु), पर्व गीत (कर्मा, जावा), श्रम गीत (रोपनी, धान कूटनी) तथा सामाजिक संदेश गीतों की पहचान कर उनके संचारी महत्व का मूल्यांकन किया गया है। शोध के लिए प्राथमिक आंकड़ों का संकलन छिपतला गाँव में एक विवाह समारोह के प्रत्यक्ष अवलोकन (Participant Observation) तथा स्थानीय निवासियों से गहन साक्षात्कार के माध्यम से किया गया है। निष्कर्ष दर्शाते हैं कि आधुनिक जनसंचार माध्यमों एवं धार्मिक परिवर्तनों (ईसाई धर्म का प्रभाव) के बावजूद उरांव समाज ने अपनी पारंपरिक संचारी विरासत को जीवंत रखा है, जिसमें 'धुमकुड़िया' (युवागृह) जैसी पारंपरिक संस्थाएं केंद्रीय भूमिका निभा रही हैं।
Keywords उरांव जनजाति, लोक संचार, लोकगीत, छत्तीसगढ़, जशपुर, छिपतला गाँव, संस्कार गीत, कर्मा त्योहार, धुमकुड़िया (युवागृह)
Published In Volume 6, Issue 2, March-April 2024
Published On 2024-04-20

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