International Journal For Multidisciplinary Research

E-ISSN: 2582-2160   •   Impact Factor: 9.24

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भारत में संग्रहालय के माध्यम से पर्यावरण चेतना: एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

Author(s) Dr. Sangeeta Kumari
Country India
Abstract सारांश
औद्योगीकरण, तीव्र जनसंख्या वृद्धि, वनों की कटाई, प्रदूषण तथा प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण पर्यावरणीय क्षरण आज विश्व की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक बन गया है। ऐसी परिस्थितियों में पर्यावरण चेतना का विकास सतत विकास तथा पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। प्रस्तुत अध्ययन भारत में संग्रहालयों की भूमिका का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में विश्लेषण करता है तथा यह स्पष्ट करता है कि पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति सम्मान की परंपरा भारतीय सभ्यता में प्राचीन काल से विद्यमान रही है। सिंधु घाटी सभ्यता, बौद्ध एवं जैन दर्शन, सम्राट अशोक के शिलालेखों तथा कौटिल्य के अर्थशास्त्र में प्रकृति, वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष बल दिया गया है। अध्ययन में यह प्रतिपादित किया गया है कि संग्रहालय केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे पर्यावरण शिक्षा और जन-जागरूकता के प्रभावी माध्यम भी हैं। प्रदर्शनी, मॉडल, डायरामा, चित्र, चलचित्र, कार्यशालाएँ, मोबाइल संग्रहालय तथा सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से संग्रहालय विभिन्न आयु, शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के लोगों तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुँचा सकते हैं। विशेष रूप से प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय, सामुदायिक संग्रहालय, ग्रामीण संग्रहालय, वनस्पति उद्यान, चिड़ियाघर तथा विज्ञान संग्रहालय जैव-विविधता संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, जल संरक्षण, जनसंख्या नियंत्रण, नवीकरणीय ऊर्जा तथा संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण के प्रति जनसाधारण को जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अध्ययन में राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय तथा बिड़ला औद्योगिक एवं तकनीकी संग्रहालय जैसे संस्थानों द्वारा संचालित पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया गया है। निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि संग्रहालय अतीत की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत को वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों से जोड़ते हुए जनभागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं। अतः पर्यावरण संरक्षण, पारिस्थितिक उत्तरदायित्व तथा सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए संग्रहालयों को एक सशक्त शैक्षिक एवं सामाजिक संस्था के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
Keywords मुख्य शब्द: पर्यावरण चेतना, संग्रहालय, सतत विकास, संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन।
Field Arts
Published In Volume 8, Issue 3, May-June 2026
Published On 2026-06-08

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